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जलौनी लकड़ी की आड़ में सागौन-खैर की तस्करी, टांडा रेंज में ‘बड़ा खेल’ उजागर!
गैस किल्लत के बीच सक्रिय हुए लकड़ी तस्कर, वन विभाग की भूमिका पर उठे सवाल!
दर्पण न्यूज 24/7 लालकुआं। तराई केन्द्रीय वन प्रभाग के अंतर्गत टांडा रेंज के जंगल इन दिनों अवैध लकड़ी तस्करी का बड़ा केंद्र बने हुए हैं। आरोप है कि जलौनी लकड़ी की आड़ में सागौन और खैर जैसी बेशकीमती ईमराती लकड़ी की खुलेआम कटाई और तस्करी की जा रही है, जबकि वन विभाग तमाशबीन बना हुआ है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, तस्कर पहले हरे पेड़ों की कटाई करते हैं और फिर उन्हें जलौनी लकड़ी बताकर छोटे वाहनों—टेम्पो और पिकअप—में भरकर किच्छा और हल्द्वानी तक पहुंचा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि लकड़ी से लदे ये वाहन थानों और वन चौकियों के सामने से बेखौफ गुजरते हैं, लेकिन कहीं कोई रोकटोक नहीं होती।
हैरानी कि बात यह है कि यह पूरा खेल वन विभाग के टांडा रेंज कार्यालय के आसपास ही धड़ल्ले से संचालित हो रहा है। जंगल से लकड़ी पहले साइकिलों और सिर पर ढोकर बाहर लाई जाती है, फिर उसे वाहनों में लोड कर दिया जाता है। इसके बावजूद विभाग की नजर इस पर नहीं पड़ रही, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है।
सूत्रों का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क में वन विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत भी हो सकती है। आरोप है कि जलौनी लकड़ी की अनुमति देने के नाम पर सुविधा शुल्क लिया जाता है और उसी अनुमति का दुरुपयोग कर तस्कर बेशकीमती पेड़ों का सफाया कर रहे हैं। इससे वन संपदा को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
वर्तमान में चल रही गैस किल्लत के बीच लकड़ी की मांग बढ़ी है, जिसका फायदा उठाकर लकड़ी माफिया सक्रिय हो गए हैं। जरूरत के नाम पर ली जा रही अनुमति अब बड़े पैमाने पर अवैध कटान और तस्करी का जरिया बन चुकी है।
हालांकि बीती रात वन विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए लकड़ी से लदे दो टुक-टुक वाहनों को पकड़कर रेंज कार्यालय में सीज किया है, लेकिन इसे महज खानापूर्ति माना जा रहा है। क्षेत्र में दिन-रात दौड़ रहे दर्जनों वाहनों के मुकाबले यह कार्रवाई नाकाफी नजर आती है।
लगातार हो रही अवैध कटाई और तस्करी के बावजूद ठोस कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े कर रहा है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो तराई क्षेत्र की बहुमूल्य वन संपदा को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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