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टांडा रेंज अवैध कटाई मामला: “अज्ञात” के सहारे जुर्माने की तैयारी, वन विभाग की लाचारी या बचाव?
दर्पण न्यूज 24/7, लालकुआं।
तराई केंद्रीय वन प्रभाग रुद्रपुर डिवीजन की टांडा रेंज में सागौन और शीशम के दर्जनों हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में अब एक नया मोड़ सामने आया है। विभाग ने कार्रवाई की बात तो कही है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि मामला अभी भी “अज्ञात लोगों” के खिलाफ दर्ज किए जाने की चर्चा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब आरोपी ही अज्ञात हैं तो आखिर जुर्माना किससे वसूला जाएगा?
सूत्रों के मुताबिक पत्थरचट्टा बीट संख्या 13, 14, 4 और 2 में पिछले करीब तीन महीनों के दौरान बड़े पैमाने पर सागौन और शीशम के कीमती पेड़ों पर आरा चला। जंगल के भीतर पेड़ काटे गए, लकड़ी बाहर तक पहुंची, लेकिन वन विभाग और वन सुरक्षा दल को इसकी भनक तक नहीं लगी। अब जब मामला उजागर हुआ है तो विभाग “अज्ञात के खिलाफ कार्रवाई” और जुर्माने की बात कहकर अपनी जिम्मेदारी से बचता नजर आ रहा है।
जानकारों का कहना है कि वन अधिनियम के तहत जुर्माना उसी व्यक्ति से वसूला जाता है जो अवैध कटान या तस्करी में पकड़ा जाए। ऐसे में जब विभाग खुद ही यह कह रहा है कि आरोपी अज्ञात हैं, तो फिर जुर्माने की बात महज औपचारिकता या बचाव का रास्ता प्रतीत हो रही है।
इस पूरे प्रकरण ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जंगलों की निगरानी के लिए बनाए गए वन सुरक्षा दल की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि तीन महीने तक जंगल के भीतर दर्जनों पेड़ों की कटाई होती रही और गश्त करने वाली टीम को इसकी जानकारी तक नहीं हुई, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर चूक मानी जानी चाहिए।
पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों का कहना है कि केवल “अज्ञात” के खिलाफ मामला दर्ज कर देने से न तो जंगल बचेंगे और न ही जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होगी। उनका मानना है कि इस मामले में वन सुरक्षा दल और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वन विभाग इस मामले में वास्तविक दोषियों तक पहुंचेगा या फिर “अज्ञात” के नाम पर फाइल बंद कर दी जाएगी। फिलहाल टांडा रेंज में हुई यह घटना जंगलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न बनकर खड़ी है।

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