हाईकोर्ट में चल रहे मामले ने खोली इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की पोल! पढ़ें किस समाजसेवी ने मुख्य चिकित्साधिकारी को भेजा विस्फोटक पत्र, उठाए गंभीर सवाल।
दर्पण न्यूज 24/7 | हल्दूचौड़
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हल्दूचौड़ की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य एवं सामाजिक कार्यकर्ता गोविंद बल्लभ भट्ट ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी नैनीताल को एक विस्तृत पत्र भेजकर अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं, चिकित्सकों की कमी और बंद पड़ी स्वास्थ्य सेवाओं पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष वास्तविक स्थिति उजागर की जाएगी।
गोविंद बल्लभ भट्ट ने अपने पत्र में कहा है कि 30 बेड के इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति कागजों और जमीनी हकीकत में बिल्कुल अलग है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल पहले से ही स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा है, इसके बावजूद एक्स-रे सेवा शुरू कराने वाले प्रशिक्षित तकनीशियन को चारधाम यात्रा ड्यूटी में भेज दिया गया है। उनका कहना है कि न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के कारण यहां से किसी भी चिकित्सक या पैरामेडिकल कर्मचारी को अन्यत्र नहीं भेजा जाना चाहिए।
पत्र में अस्पताल में डॉक्टरों की वास्तविक उपलब्धता पर भी सवाल उठाए गए हैं। भट्ट के अनुसार रिकॉर्ड में पांच चिकित्सक दर्शाए जा रहे हैं, जबकि स्थायी रूप से केवल दो चिकित्सक ही कार्यरत हैं। कुछ डॉक्टर लंबे अवकाश अथवा अन्य पदस्थापना के कारण अस्पताल को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं। उन्होंने भारतीय जन स्वास्थ्य मानकों का हवाला देते हुए स्थायी चिकित्सकों और अन्य कर्मचारियों की तैनाती के लिए शासन को तत्काल प्रस्ताव भेजने की मांग की है।
अल्ट्रासाउंड सेवा के बंद होने को उन्होंने गंभीर विषय बताया है। उनका कहना है कि पिछले कई महीनों से अल्ट्रासाउंड सुविधा ठप पड़ी है, जिससे गर्भवती महिलाओं को निजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं प्रसव सेवा को लेकर भी उन्होंने प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि उच्च न्यायालय ने 15 अप्रैल 2026 को छह सप्ताह के भीतर प्रसव सेवाएं शुरू करने के निर्देश दिए थे, लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी अस्पताल में प्रसव सेवा शुरू नहीं हो सकी है।
लैब सेवाओं को लेकर भी सामाजिक कार्यकर्ता ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पहले चंदन डायग्नोस्टिक के माध्यम से आयुष्मान एवं आधार आधारित निशुल्क जांचें की जाती थीं, जबकि अब पावर ग्रिड कंपनी द्वारा अस्पताल को लाखों रुपये की लैब सामग्री उपलब्ध कराई जा चुकी है। इसके बावजूद सरकारी लैब शुरू नहीं हो पाई है। उन्होंने उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर तत्काल सरकारी लैब संचालित करने की मांग की है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि उक्त स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिदिन लगभग 300 से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। भारतीय जन स्वास्थ्य मानकों के अनुसार एक चिकित्सक पर निर्धारित मरीज भार से कहीं अधिक मरीजों का दबाव होने के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। ऐसे में अतिरिक्त रोगी भार को देखते हुए स्थायी चिकित्सकीय व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
गोविंद बल्लभ भट्ट ने मई 2026 में प्रदेश में हुई चिकित्सकीय नियुक्तियों का भी हवाला दिया है। उनका कहना है कि प्रदेश में 243 पदों पर नियुक्तियां हुईं, लेकिन सीएचसी हल्दूचौड़ को इसका लाभ नहीं मिला। उन्होंने शासनादेशों के अनुपालन के साथ अस्पताल को प्राथमिकता के आधार पर डॉक्टर और स्टाफ उपलब्ध कराने की मांग की है।
इसके अलावा उन्होंने अस्पताल में वित्तीय एवं प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 30 बेड के सीएचसी में स्थायी आहरण-वितरण अधिकारी की नियुक्ति तथा
मानकों के अनुसार स्वीकृत सभी पदों की सूची सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई है।
पत्र की प्रतिलिपि प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, उत्तराखंड शासन को भी भेजी गई है। साथ ही आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गौनिया ने भी अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर चिंता जताते हुए शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।
अब सवाल यह है कि जब मामला स्वयं उच्च न्यायालय की निगरानी में है, तब भी हल्दूचौड़ सीएचसी में मूलभूत स्वास्थ्य सेवाएं क्यों पटरी पर नहीं आ पा रही हैं। आने वाले दिनों में स्वास्थ्य विभाग इस पत्र पर क्या कार्रवाई करता है, इस पर क्षेत्रवासियों की नजरें टिकी हुई हैं।
