








टिकट मिला, बदला गया… अब उसी कांग्रेस से फिर उम्मीद!
2022 में कांग्रेस ने बनाया था लालकुआं से प्रत्याशी, चुनाव से पहले बदला फैसला, निर्दलीय मैदान में उतरीं और पार्टी से हुईं बाहर—अब 2027 से पहले ‘हाथ’ में वापसी की सियासी चर्चा!
दर्पण न्यूज 24/7 लालकुआं: सियासत में वक्त बदलता है तो समीकरण भी बदलते हैं। चार साल पहले जिस लालकुआं विधानसभा सीट पर संध्या डालाकोटी को कांग्रेस का टिकट मिलने के महज दो दिन बाद अचनक प्रत्याशी बदल दिया गया था, अब उसी सीट पर 2027 के चुनाव से पहले उनका नाम फिर राजनीतिक चर्चाओं में है। सवाल सीधा है—क्या 2022 की सियासी चोट के बाद संध्या डालाकोटी एक बार फिर कांग्रेस के ‘हाथ’ का साथ थामेंगी? और क्या पार्टी उन्हें लालकुआं से दोबारा मौका देगी?
फिलहाल कांग्रेस ने न तो संध्या डालाकोटी की वापसी की आधिकारिक घोषणा की है और न ही 2027 के लिए टिकट को लेकर कोई फैसला किया है। लिहाजा उनकी वापसी और दावेदारी को फिलहाल राजनीतिक चर्चा के तौर पर ही देखा जा रहा है। लेकिन लालकुआं की चुनावी राजनीति में उनका नाम दोबारा उभरना अपने आप में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
आंदोलन की जमीन से सत्ता के गलियारों तक
संध्या डालाकोटी का राजनीतिक सफर सीधे विधानसभा की राजनीति से शुरू नहीं हुआ। गौलापार के ग्रामीण इलाकों में जनसमस्याओं को लेकर सक्रियता से उन्होंने अपनी राजनीतिक जमीन तैयार की। क्षेत्र पंचायत सदस्य के रूप में राजनीतिक पारी शुरू करने वाली संध्या ने स्थानीय मुद्दों को लेकर संघर्ष किया।
वर्ष 2008 में क्षतिग्रस्त गौला पुल के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर वह पति किरन डालाकोटी और ग्रामीणों के साथ आंदोलन में उतरीं। पुल निर्माण की मांग को लेकर भूख हड़ताल तक हुई। उस आंदोलन ने उन्हें क्षेत्रीय राजनीति में अलग पहचान दिलाई।
इसके बाद वर्ष 2012 में वह हल्द्वानी विकासखंड की ब्लॉक प्रमुख निर्विरोध निर्वाचित हुईं। क्षेत्र पंचायत सदस्य से ब्लॉक प्रमुख तक का सफर संध्या डालाकोटी के बढ़ते राजनीतिक कद की कहानी कहता है।
पति किरन की लंबी राजनीतिक पृष्ठभूमि
संध्या डालाकोटी की राजनीति के पीछे उनके पति किरन डालाकोटी की लंबी संगठनात्मक पृष्ठभूमि भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। छात्र राजनीति और एनएसयूआई से शुरुआत करने के बाद किरन कांग्रेस संगठन में सक्रिय रहे और विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं।
पुराने दस्तावेजों में वर्ष 2002 में कांग्रेस से विधानसभा चुनाव की दावेदारी का उल्लेख मिलता है। राज्य आंदोलन और क्षेत्रीय मुद्दों से जुड़े आंदोलनों में भी उनकी सक्रियता रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ उनकी पुरानी तस्वीरें उनके लंबे राजनीतिक सफर और संगठनात्मक संपर्कों की झलक पेश करती हैं।
संध्या डालाकोटी की कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ तस्वीरें भी उनके राजनीतिक जुड़ाव की कहानी कहती हैं। हालांकि तस्वीरें वर्तमान पद या टिकट की पुष्टि नहीं करतीं, लेकिन डालाकोटी दंपती के कांग्रेस से पुराने राजनीतिक रिश्ते जरूर सामने रखती हैं।
2022 में आया वो मोड़, जिसने बदल दी सियासी राह
वर्ष 2022 में संध्या डालाकोटी को कांग्रेस ने लालकुआं से विधानसभा प्रत्याशी बनाया। टिकट मिलने के बाद उन्होंने चुनावी तैयारी शुरू की, लेकिन चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी बदल दिया। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को मैदान में उतारे जाने के बाद संध्या के सामने राजनीतिक रास्ते का सबसे बड़ा फैसला खड़ा हुआ।उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया।कांग्रेस से टिकट मिलने के बावजूद चुनावी मैदान में पार्टी के खिलाफ उतरने का यह फैसला लालकुआं की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय रहा। चुनाव परिणाम में बीजेपी के डॉ. मोहन सिंह बिष्ट विजयी हुए। इसके बाद संध्या डालाकोटी को कांग्रेस से निष्कासन का सामना करना पड़ा। यानी जिस चुनाव में वह कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा पहुंचने की तैयारी कर रही थीं, उसी चुनाव ने उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया।
अब 2027 की बिसात पर फिर संध्या का नाम
2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। लालकुआं में भी संभावित प्रत्याशियों को लेकर अंदरखाने चर्चाएं तेज हैं। इसी बीच संध्या डालाकोटी के कांग्रेस में लौटने और लालकुआं से फिर दावेदारी करने की चर्चा सामने आई है।
यदि ऐसा होता है तो यह केवल किसी नेता की पार्टी वापसी नहीं होगी, बल्कि 2022 में अधूरी छूटी एक राजनीतिक कहानी का दोबारा शुरू होना भी होगा।
संध्या के समर्थक उनके पुराने जनसरोकार, ब्लॉक प्रमुख के तौर पर अनुभव और कांग्रेस संगठन से लंबे जुड़ाव को उनकी राजनीतिक ताकत के रूप में देखते हैं। दूसरी ओर कांग्रेस के सामने 2027 के लिए टिकट के कई दावेदार हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व किस चेहरे पर भरोसा जताता है, यह आने वाले महीनों में साफ होगा।
तस्वीरों में दिखता पुराना कांग्रेस कनेक्शन
राजनीतिक गलियारों में संध्या और किरन डालाकोटी की वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के साथ मौजूद पुरानी तस्वीरों की भी चर्चा है। किरन डालाकोटी की कांग्रेस के सिरमौर राहुल गांधी,पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी,हरीश रावत
सहित कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के साथ तस्वीरें उनके लंबे राजनीतिक संपर्कों की झलक देती हैं।
लेकिन राजनीति में पुराने रिश्तों की असली परीक्षा वक्त आने पर होती है। सवाल यह है कि क्या ये पुराने संगठनात्मक रिश्ते और क्षेत्र में बनी राजनीतिक पहचान 2027 में टिकट की राह आसान कर पाएंगे?
2022 की टीस, 2027 की उम्मीद
संध्या डालाकोटी के राजनीतिक सफर का सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या 2022 में बदला गया टिकट 2027 में कांग्रेस से उनकी वापसी की वजह बनेगा या उनके राजनीतिक सफर का वह अध्याय हमेशा के लिए बंद हो चुका है?
लालकुआं की सियासत में अभी तस्वीर साफ नहीं है। कांग्रेस के टिकट पर अंतिम फैसला भी दूर है और संध्या की वापसी की आधिकारिक पुष्टि भी नहीं हुई है।
लेकिन सियासत की यही तो खासियत है—कल का विरोधी कभी फिर अपना बन सकता है और कल का टिकट आज फिर उम्मीद बन सकता है।
2022 में टिकट मिला था, फिर बदल गया था।
2027 में क्या होगा—टिकट फिर मिलेगा, या कहानी फिर बदलेगी?
फिलहाल जवाब कांग्रेस नेतृत्व के पास है, लेकिन 56-लालकुआं की चुनावी बिसात पर संध्या डालाकोटी का नाम एक बार फिर मोहरा नहीं, बल्कि चर्चा का अहम केंद्र जरूर बनता दिखाई दे रहा है।
