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सरकार का काम रखरखाव करना है, बेदखल करना नहीं।
जन संगठनों ने बुलडोजर व बेदखल कार्रवाई को बताया जन-विरोधी।
रामनगर। बुलडोजर राज के खिलाफ भवानीगंज रामलीला मैदान में आयोजित जन सम्मेलन में जन संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भाजपा सरकार द्वारा बुलडोजर चलाकर लोगों को बेदखल किए जाने की कार्रवाई को जन-विरोधी, संविधान-विरोधी और गैर-कानूनी करार दिया। वक्ताओं ने एकजुट होकर इसके खिलाफ संघर्ष तेज करने का आह्वान किया। सम्मेलन में निर्णय लिया गया कि उत्तराखंड सहित देशभर में की जा रही बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में सड़क पर आंदोलन को और धार दी जाएगी।
सम्मेलन में यह भी तय किया गया कि इस मुद्दे पर उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में प्रभावी पैरवी की जाएगी। साथ ही आगामी एक माह के भीतर गढ़वाल मंडल में भी बुलडोजर राज के खिलाफ जन सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता रविंद्र गढ़िया ने कहा कि जनता ही जमीन की वास्तविक मालिक है। सरकार और प्रशासन का दायित्व उसका रखरखाव करना है, न कि लोगों को बेदखल करना। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर धामी पर निशाना साधते हुए कहा कि खटीमा से चुनाव हारने के बाद चंपावत की सीट खाली कराकर उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया, ताकि बड़े पैसे वालों के हित साधे जा सकें।
वक्ताओं ने कहा कि आजादी के 50–60 वर्षों से वन भूमि में बसे लोग राजस्व गांव का अधिकार मांग रहे हैं, लेकिन न्यायालय के निर्देशों की आड़ में राज्य के लोगों को योजनाबद्ध तरीके से उजाड़ा जा रहा है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने प्रदेश में वनाधिकार कानून 2006 को प्रभावी रूप से लागू करने की मांग करते हुए कहा कि उत्तराखंड में जो व्यक्ति जहां निवास, खेती और कारोबार कर रहा है, उसे वहीं पर मालिकाना अधिकार दिया जाए।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 7 दिसंबर को उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए स्टे आदेश के बावजूद उन पर बुलडोजर कार्रवाई की गई। उन्होंने आदेश का उल्लंघन करने वाले डीएफओ व अन्य अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। इसके साथ ही अंकिता हत्याकांड की सीबीआई जांच, जंगली जानवरों से इंसानों, फसलों और मवेशियों की सुरक्षा, तथा पूछड़ी समेत देशभर में हटाए गए लोगों के पुनर्वास की मांग भी उठाई गई।
जन सम्मेलन में जनकवि बल्ली सिंह चीमा, महिला किसान अधिकार मंच की हीरा जंगपांगी, खीम राम, वन पंचायत संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष तरुण जोशी, चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल, समाजवादी लोकमंच के मुनीष कुमार, उत्तराखंड सेवा समिति पूछड़ी के उर्वादत्त नैनवाल, वन गूजर युवा ट्राइबल संगठन के अध्यक्ष अमीर हमजा, सेंटर फॉर स्ट्रगलिंग ट्रेड यूनियंस के मुकुल, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के महासचिव प्रभात ध्यानी, इंकलाबी मजदूर केंद्र के रोहित रुहेला, भुवन चंद्र, बिंदुखत्ता वन समिति के बसंत पांडे, महिला एकता मंच की सरस्वती जोशी, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की तुलसी छिंबाल, संघर्ष समिति के संयोजक ललित उप्रेती सहित राजा, सतेन्द्र पटवाल, फूल कुमार, अंजलि रावत, रेनू सैनी आदि मौजूद रहे।
— दर्पण न्यूज 24×7
रामनगर संवाददाता: करन तिवारी