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**“इशारों-इशारों में छलक गई मन की टीस…”

पैराशूट राजनीति पर कमलेश चंदोला का दर्द — बोले, लालकुआं की जनता चुनावी मौसम के रिश्ते नहीं मानती**

दर्पण न्यूज 24/7, लालकुआं।

लालकुआं विधानसभा में चुनावी हलचल अभी भले सतह पर ज्यादा दिखाई न दे रही हो, लेकिन अंदरखाने सियासत का पारा लगातार चढ़ने लगा है। भाजपा के भीतर बढ़ती दावेदारियों और “पैराशूट राजनीति” की चर्चाओं के बीच वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य कमलेश चंदोला का बयान अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

कमलेश चंदोला ने बिना किसी का नाम लिए इशारों-इशारों में ऐसी बातें कही, जिन्हें स्थानीय राजनीति में “बाहरी चेहरों” और चुनावी मौसम में सक्रिय होने वाले नेताओं पर सीधा तंज माना जा रहा है। उनके शब्दों में कहीं एक पुराने कार्यकर्ता की पीड़ा झलकी तो कहीं संगठन और जमीन से जुड़े लोगों की अनदेखी का दर्द भी साफ नजर आया।

विशेष बातचीत में चंदोला ने कहा कि लालकुआं की जनता अब काफी जागरूक हो चुकी है। यहां लोग यह अच्छी तरह समझते हैं कि कौन वर्षों से क्षेत्र की धूल फांक रहा है और कौन चुनाव आते ही अचानक क्षेत्र के प्रति प्रेम जताने लग जाता है।

उन्होंने कहा कि राजनीति केवल चुनावी दौर में दिखने या बड़े नामों के सहारे मैदान में उतरने का माध्यम नहीं है। जनता उस व्यक्ति को याद रखती है, जिसने हर परिस्थिति में क्षेत्र के लोगों के साथ खड़े होकर काम किया हो।

चंदोला ने लोकतंत्र में हर व्यक्ति को राजनीति करने का अधिकार बताते हुए कहा कि भाजपा में टिकट केवल पहचान या दबाव से तय नहीं होता। पार्टी संगठन कार्यकर्ताओं की भावना, जनता की स्वीकार्यता और सर्वे रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लेती है।

अपने बयान को मजबूती देते हुए उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, भाजपा के वरिष्ठ नेता स्वर्गीय प्रकाश पंत और हेमंत द्विवेदी का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े चेहरे भी यदि जनता के दिल में जगह नहीं बना पाते तो राजनीतिक समीकरण बदल जाते हैं।

स्वर्गीय प्रकाश पंत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने लालकुआं में रहकर काफी मेहनत की, संगठन खड़ा किया, लेकिन जब सर्वे में अपेक्षित समर्थन नहीं मिला तो पार्टी ने उन्हें दूसरी सीट से चुनाव लड़ाया। इससे साफ है कि भाजपा में अंतिम निर्णय जनता की भावना को देखकर लिया जाता है।

राजनीतिक हलकों में चंदोला के इस बयान को पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के भतीजे दीपेंद्र कोश्यारी की बढ़ती सक्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि चंदोला ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन “चुनावी मौसम का प्यार”, “जनता सब पहचानती है” और “जमीन से जुड़े लोगों की मेहनत” जैसे शब्दों ने सियासी गलियारों में कई संकेत छोड़ दिए हैं।

सूत्रों की मानें तो लालकुआं सीट पर भाजपा के भीतर कई चेहरे सक्रिय हो चुके हैं। वर्तमान विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं, वहीं पूर्व विधायक नवीन दुम्का, उमेश शर्मा समेत कई अन्य नेता भी लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं।

ऐसे में कमलेश चंदोला का यह बयान केवल एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि भाजपा की अंदरूनी राजनीति में “स्थानीय बनाम पैराशूट चेहरे” की बहस को खुलकर सामने लाने वाला माना जा रहा है। फिलहाल चुनावी रणभेरी भले अभी दूर हो, लेकिन इतना तय है कि लालकुआं की सियासत में अब इशारों-इशारों में नेताओं के मन की टीस बाहर आने लगी हैं।

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