“रसूखदारों की दीवार के आगे बेबस जनता!”
हिमालया स्टोन क्रशर की मनमानी पर फूटा गुस्सा, प्रशासन पहुंचा मगर स्टोन क्रशर प्रबंधन रहा गायब।
दर्पण न्यूज 24/7 लालकुआं। क्षेत्र के मोतीनगर में स्थित हिमालया स्टोन क्रशर और हिमालया ग्रिड पर सरकारी नहर और रास्ते को अवरुद्ध करने के आरोपों को लेकर क्षेत्रवासियों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रशासनिक सर्वे के दौरान आज पदमपुर देवलिया के प्रधान रमेश जोशी, वरिष्ठ माले नेता बहादुर सिंह जंगी, समाजसेवी नंदन पड़ालनी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर नाराजगी जताई और प्रशासन पर रसूखदारों के सामने नरमी बरतने का आरोप लगाया।
ग्रामीणों का कहना है कि अंग्रेजों के जमाने से संचालित काठगोदाम–लालकुआं फीडर की महत्वपूर्ण सिंचाई नहर के बीच में दीवार खड़ी कर रोक दिया गया है। आरोप है कि हिमालया स्टोन क्रशर द्वारा सरकारी भूमि और नहर और पुरानी आंतरिक सड़क में अवरोध खड़ा कर दिया गया, लेकिन प्रशासन द्वारा कार्रवाई के नाम पर केवल गरीब बस्तीवासियों को नोटिस थमाए जा रहे हैं।
आज उक्त प्रकरण के निराकरण के लिए एसडीएम रेखा कोहली समेत प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और क्षेत्रीय लोगों की समस्याएं सुनीं, किंतु ग्रामीणों के अनुसार स्टोन क्रशर प्रबंधन मौके पर नहीं पहुंचा। इसे लेकर लोगों में और अधिक नाराजगी देखने को मिली। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब प्रशासन स्वयं मौके पर मौजूद था तो संबंधित पक्ष का अनुपस्थित रहना आखिर किस संरक्षण की ओर इशारा करता है।
प्रधान रमेश जोशी ने कहा कि यदि सरकारी नहर और रास्ते पर कब्जा हुआ है तो प्रशासन को निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर गरीबों को उजाड़ने की जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है, जबकि प्रभावशाली लोगों द्वारा किए गए अवरोध पर प्रशासन मौन बना हुआ है।
वरिष्ठ माले नेता बहादुर सिंह जंगी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह केवल रास्ते या नहर का मामला नहीं बल्कि सत्ता और रसूख के दम पर जनता के अधिकार कुचलने का मामला है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द रास्ता और नहर नहीं खोली गई तो क्षेत्रवासी बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
समाजसेवी नंदन पड़ालनी ने कहा कि बरसात के समय नहर बाधित रहने से पानी आबादी की ओर फैल सकता है, जिससे मोतीनगर और आसपास खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल दीवार हटाने, नहर को चालू कराने और पुराने रास्ते को बहाल करने की मांग की।
ग्रामीणों का आरोप है कि एक ओर वर्षों से बसे गरीब परिवारों को हटाने के नोटिस दिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी जमीन और नहर क्षेत्र में अवरोध खड़ा करने वालों पर कोई सख्त कदम नहीं उठाया जा रहा। इससे क्षेत्र में भारी नाराजगी और रोष व्याप्त है।
अब यह विवाद स्थानीय जनसुविधाओं से आगे बढ़कर “गरीब बनाम रसूखदार” की लड़ाई बनता दिखाई दे रहा है। क्षेत्रवासियों ने साफ कर दिया है कि यदि प्रशासन ने निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
