दर्पण न्यूज़ 24×7
संवाददाता – धर्मेन्द्र शर्मा
आत्मनिर्भर उत्तराखंड की राह में मील का पत्थर साबित होगी जमरानी बांध परियोजना, साहसिक पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा।
जमरानी (नैनीताल)। सन् 1977 से बहुचर्चित और लंबे समय से अटकी पड़ी जमरानी बांध परियोजना अब अपने उतार–चढ़ाव पार कर धीरे-धीरे वास्तविक स्वरूप लेती दिख रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संज्ञान में आने के बाद राज्य की धामी सरकार ने इस परियोजना को मूर्त रूप देने में विशेष प्रयास तेज कर दिए हैं।
राज्य सरकार ने वर्ष 2010 में उत्तराखंड प्रोजेक्ट डेवलपमेंट एंड कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPDCC) की स्थापना की थी, ताकि प्रदेश में सिविल इंजीनियरिंग से जुड़ी निर्माण एवं परामर्श सेवाओं को गति दी जा सके। इसके बाद यूपीडीसीसी ने परियोजना के अंतर्गत कार्य प्रारंभ किया और सिंचाई विभाग को बांध निर्माण का दायित्व सौंपा गया।
लंबी प्रक्रिया के बाद मिली स्वीकृतियाँ
जमरानी परियोजना को पहली प्रशासनिक स्वीकृति वर्ष 1975 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने दी थी, जबकि योजना आयोग ने 61.25 करोड़ की तकनीकी स्वीकृति प्रदान की। मई 1989 में सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण और बहुउद्देशीय परियोजनाओं की सलाहकार समिति ने परियोजना को कुछ शर्तों के साथ दो चरणों में अनुमोदित किया—
पहला चरण: गौला बैराज निर्माण
40.5 किमी नहर प्रणाली
244 किमी नहर प्रणाली का नवीनीकरण
परियोजना के प्रमुख लाभ
जमरानी बांध का उद्देश्य उत्तराखंड के तराई–भाबर क्षेत्र सहित उत्तर प्रदेश के चार जिलों में कुल 57,065 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई उपलब्ध कराना है। साथ ही हल्द्वानी शहर की वर्ष 2051 तक की अनुमानित जनसंख्या (10,65,000) के लिए प्रतिदिन 42.70 लाख लीटर पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना इस परियोजना का बड़ा लक्ष्य है।
इसके अतिरिक्त परियोजना से—
भू-जल पुनर्भरण में वृद्धि
पर्यटन एवं साहसिक पर्यटन को बढ़ावा
मत्स्य पालन को मजबूती
स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार—
मिलने की अपेक्षा है।
बजट एवं वित्तीय स्वीकृतियाँ
वर्ष 2018 में परियोजना की अनुमानित लागत 2584.10 करोड़ निर्धारित की गई। इसके बाद:
दिसंबर 2019: जल मंत्रालय की बैठक में स्वीकृति
जून 2022: जल संसाधन विभाग एवं जल शक्ति मंत्रालय द्वारा अनुमोदन
अक्टूबर 2023: पीएम की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति नेपीएमकेएसवाई-एआईबीपी के अंतर्गत मंजूरी प्रदान की केंद्रीय सहायता के रूप में 1557.18 करोड़ स्वीकृत किए गए, जबकि राज्य सरकार ने 13 मार्च 2024 को 3808.16 करोड़ की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति दी।
2029 में राष्ट्र को समर्पित होगा बांध
परियोजना प्रबंधक उमेश अग्रवाल ने बताया कि जून 2029 तक जमरानी बांध को राष्ट्र को समर्पित कर दिया जाएगा। वहीं अधिशासी अभियंता योगेश कांडपाल के अनुसार भौगोलिक परिस्थितियाँ परियोजना के अनुरूप होने से कार्य चरणबद्ध रूप से तेजी से आगे बढ़ रहा है।
भीमताल ब्लॉक को मिलेगा बड़ा लाभ
भीमताल ब्लॉक प्रमुख डॉ. हरीश बिष्ट का कहना है कि जमरानी बांध भारत के पहाड़ी राज्यों में बनने वाला पांचवा सबसे बड़ा बांध होगा। यह न केवल रोजगार के नए अवसर खोलेगा, बल्कि आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

