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हल्द्वानी में आज से सजेगा जोहार महोत्सव, तीन दिन गूंजेंगे पहाड़ के लोकगीत और लोकनृत्य!

शौका संस्कृति की भव्य शोभायात्रा से होगा आगाज, नेपाल के लोकगायक सुरेश शाही और बबल आर्टिस्ट विक्रम बोरा रहेंगे खास आकर्षण; पहाड़ी व्यंजन, ऐपण और पारंपरिक वेशभूषा प्रतियोगिताओं में दिखेगी लोक विरासत की झलक!

हल्द्वानी। पहाड़ की संस्कृति को करीब से देखना है, पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद लेना है और ढोल-दमाऊ की थाप पर झोड़ा-चांचरी का आनंद उठाना है तो अगले तीन दिन हल्द्वानी में आपके लिए खास होने जा रहे हैं। एमबी इंटर कॉलेज मैदान में शुक्रवार यानी 30 अक्टूबर से 17वें जोहार महोत्सव का भव्य आगाज होने जा रहा है। एक नवंबर तक चलने वाले इस तीन दिवसीय आयोजन में लोक संस्कृति, संगीत, पारंपरिक कला और पहाड़ी खानपान का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

इस बार महोत्सव में केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियां ही नहीं होंगी, बल्कि शौका समुदाय की पारंपरिक वेशभूषा, पहाड़ी महिलाओं के हुनर, बच्चों की प्रतिभा और स्थानीय उत्पादों को भी विशेष मंच मिलेगा। नेपाल के चर्चित लोकगायक सुरेश शाही और बबल आर्टिस्ट विक्रम बोरा की प्रस्तुतियां भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

शौका समुदाय की पारंपरिक वेशभूषा में निकलेगी शोभायात्रा

जोहार सांस्कृतिक एवं वेलफेयर सोसायटी की ओर से आयोजित महोत्सव का शुभारंभ शुक्रवार को जोहारी शौका समुदाय की पारंपरिक वेशभूषा में निकलने वाली भव्य शोभायात्रा से होगा। ढोल-दमाऊ की गूंज के बीच निकलने वाली यह यात्रा जोहार क्षेत्र की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं का परिचय कराएगी। इसके बाद महोत्सव का विधिवत शुभारंभ होगा।

पहले दिन शाम को स्थानीय कलाकारों के साथ लोकगायक फौजी ललित मोहन जोशी, दक्ष कार्की, कैलाश कुमार और गोविंद दिगारी अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधेंगे।

महिलाओं के हुनर से लेकर पहाड़ी व्यंजनों तक दिखेगी विरासत

महोत्सव का दूसरा दिन यानी 31 अक्टूबर महिलाओं और बच्चों की प्रतिभा के नाम रहेगा। इस दिन झोड़ा-चांचरी, पहाड़ी व्यंजन, ऐपण और स्वेटर बुनाई जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इन आयोजनों के जरिए पहाड़ की पारंपरिक कला, घरेलू हुनर और खानपान को नई पीढ़ी के सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।

शाम को जन जागृति सांस्कृतिक कला मंच बिंदुखत्ता की प्रस्तुति के बाद नेपाल के प्रसिद्ध लोकगायक सुरेश शाही अपनी गायकी से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे।

अंतिम दिन चित्रकला, फैंसी ड्रेस और बबल आर्ट का रोमांच

एक नवंबर को महोत्सव के अंतिम दिन भी कार्यक्रमों की रौनक बनी रहेगी। झोड़ा-चांचरी प्रतियोगिता के साथ नर्सरी से कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। बच्चों की फैंसी ड्रेस और युवाओं की पारंपरिक वेशभूषा प्रतियोगिता भी आकर्षण का हिस्सा होगी।

शाम के सत्र में बबल आर्टिस्ट विक्रम बोरा अपनी अनूठी कला का प्रदर्शन करेंगे। इसके अलावा लोकगायक गणेश मर्तोलिया, नीरज चुफाल और रुचि जंगपांगी की सांगीतिक प्रस्तुतियां महोत्सव को यादगार बनाने का प्रयास करेंगी।

स्थानीय उत्पादों को भी मिलेगा मंच

महोत्सव स्थल पर स्थानीय उत्पादों के स्टॉल भी लगाए जाएंगे। यहां लोगों को पहाड़ी खानपान और क्षेत्रीय उत्पादों को जानने और खरीदने का अवसर मिलेगा। आयोजकों के मुताबिक, महोत्सव का मकसद केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जोहार क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करना और युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ना है।

सोसायटी के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह पांगती ने कहा कि अपने को अपने से जोड़ना और शौका समुदाय की संस्कृति का संवर्धन करना महोत्सव का मूल उद्देश्य है। कार्यक्रम संयोजक कैलाश धर्मसत्तू और सांस्कृतिक सचिव नवीन तोलिया ने बताया कि तीनों दिन स्थानीय कलाकारों और सांस्कृतिक दलों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।

प्रेस वार्ता में महासचिव धीरेंद्र पांगती, प्रेम जंगपांगी सहित सोसायटी के अन्य सदस्य मौजूद रहे।

कुल मिलाकर, हल्द्वानी में अगले तीन दिन पहाड़ की संस्कृति, परंपरा, स्वाद और संगीत का संगम देखने को मिलेगा।

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