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आस्था, परंपरा और विकास का संगम: मां पूर्णागिरि मेले का आज शुभारंभ, मुख्यमंत्री धामी करेंगे देवभूमि की दिव्य यात्रा!
संवाद सहयोगी | दर्पण न्यूज 24/7 चंपावत!
उत्तर भारत की आस्था का प्रमुख केंद्र और लाखों श्रद्धालुओं की श्रद्धा का प्रतीक मां पूर्णागिरि धाम में लगने वाला ऐतिहासिक मां पूर्णागिरि मेला शुक्रवार से विधिवत आरंभ होने जा रहा है। आध्यात्मिक ऊर्जा, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से सराबोर इस मेले का शुभारंभ प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा ठूलीगाड़ में किया जाएगा।
मान्यता है कि मां पूर्णागिरि धाम में दर्शन मात्र से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। हर वर्ष चैत्र मास के आगमन के साथ शुरू होने वाला यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी आस्था, लोकसंस्कृति और हिमालयी परंपराओं का जीवंत उत्सव माना जाता है। देशभर से आने वाले श्रद्धालु यहां मां शक्ति के दरबार में शीश नवाकर आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा प्राप्त करते हैं।
जिलाधिकारी मनीष कुमार के अनुसार मुख्यमंत्री पूर्वाह्न 11 बजे ठूलीगाड़ हेलीपैड पहुंचेंगे तथा 11:20 बजे मुख्य कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर मां पूर्णागिरि मेले का विधिवत शुभारंभ करेंगे। इस दौरान वे जनपद में संचालित विकास योजनाओं का स्थलीय निरीक्षण भी करेंगे, जिससे आस्था के साथ विकास की गति को भी नई दिशा मिलेगी।
कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री अपराह्न 12:45 बजे ठूलीगाड़ से प्रस्थान कर 1:20 बजे लोहाघाट स्थित छमनिया स्पोर्ट्स मैदान हेलीपैड पहुंचेंगे। इसके पश्चात 1:40 बजे निर्माणाधीन महिला स्पोर्ट्स कॉलेज एवं स्टेडियम का निरीक्षण कर क्षेत्रीय विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे।
देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करने की कड़ी में मुख्यमंत्री अपराह्न 2:30 बजे रामलीला मैदान, लोहाघाट में आयोजित “काली कुमाऊं होली रंग महोत्सव” में प्रतिभाग करेंगे, जहां कुमाऊं की पारंपरिक होली, लोकगीत और सांस्कृतिक रंग पूरे वातावरण को भक्तिमय उल्लास से भर देंगे।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री शाम 4:10 बजे छमनिया स्पोर्ट्स मैदान हेलीपैड से ऊधम सिंह नगर जनपद के खटीमा के लिए प्रस्थान करेंगे।
मां पूर्णागिरि मेले के शुभारंभ के साथ ही चंपावत जनपद एक बार फिर श्रद्धा, संस्कृति और पर्यटन गतिविधियों के केंद्र के रूप में जीवंत हो उठेगा। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुचारू व्यवस्थाओं को लेकर व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं।
आस्था की डगर पर बढ़ते कदम, मां पूर्णागिरि का आशीर्वाद और विकास की नई शुरुआत — यही है देवभूमि की पहचान।