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तीन युद्धों के वीर योद्धा सूबेदार हिम्मत सिंह नहीं रहे!

1962, 1965 और 1971 के युद्धों में देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले वीर सपूत को क्षेत्रवासियों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि।

हल्दूचौड़। देश की सीमाओं की रक्षा के लिए वर्ष 1962, 1965 और 1971 के युद्धों में अदम्य साहस और वीरता का परिचय देने वाले पूर्व सैनिक सूबेदार हिम्मत सिंह का रविवार, 26 जुलाई 2026 को बीमारी के चलते निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही हल्दूचौड़ सहित आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। देश की सेवा में अपना जीवन समर्पित करने वाले वीर योद्धा के निधन से क्षेत्रवासियों में गहरा दुख व्याप्त है।

सूबेदार हिम्मत सिंह का जन्म 12 दिसंबर 1938 को मूल रूप से शेराघाट गांव में हुआ था। देशसेवा का जज्बा लेकर उन्होंने वर्ष 1958 में भारतीय सेना में भर्ती होकर अपने गौरवशाली सैन्य जीवन की शुरुआत की। सैन्य सेवा के दौरान उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों के साथ ही प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दीं। करीब तीन दशक तक राष्ट्र सेवा करने के बाद वह वर्ष 1986 में सेना से सेवानिवृत्त हुए।

सेवानिवृत्ति के बाद सूबेदार हिम्मत सिंह हल्दूचौड़ जग्गी में सपरिवार रह रहे थे। उनके परिवार में तीन पुत्र और दो पुत्रियां हैं। उनके ज्येष्ठ पुत्र राजेंद्र सिंह बिष्ट नैनीताल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड, लालकुआं के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं।

सूबेदार हिम्मत सिंह के निधन पर पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल, समाजसेवी हेमवती नन्दन दुर्गापाल, पूर्व विधायक नवीन दुमका, भाजपा नेता उमेश शर्मा, इंदर सिंह बिष्ट, दुग्ध संघ अध्यक्ष मुकेश बोरा, पूर्व संचालक प्रमोद कालोनी समेत तमाम जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, पूर्व सैनिकों और क्षेत्रवासियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।

शोक व्यक्त करने वालों ने कहा कि सूबेदार हिम्मत सिंह का जीवन राष्ट्र सेवा, साहस और समर्पण की मिसाल रहा। उन्होंने अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा देश की सीमाओं की रक्षा में समर्पित कर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से कामना की।

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