🔥 चार साल, 549 रोजगार मेले… फिर भी खाली हाथ लौटे युवा! उत्तराखंड में रोजगार का कड़वा सच 🔥
दर्पण न्यूज 24*7 ब्यूरो!
देहरादून।
उत्तराखंड में रोजगार की तस्वीर लगातार धुंधली होती जा रही है। प्रदेश के पढ़े-लिखे युवा उम्मीदों के साथ रोजगार मेलों में पहुंच रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि चार वर्षों में आयोजित 549 रोजगार मेलों से सिर्फ 9,255 युवाओं को ही नौकरी मिल सकी। यानी औसतन एक मेले से केवल 16–17 युवाओं को ही रोजगार मिल पाया, जबकि सैकड़ों अभ्यर्थी निराश होकर लौटे।
सेवायोजन विभाग के ताजा आंकड़े हालात की गंभीरता बयां करते हैं। राज्य में इस समय 5 लाख 14 हजार 413 पंजीकृत बेरोजगार हैं। इसके मुकाबले रोजगार मेलों से मिलने वाले अवसर बेहद सीमित साबित हो रहे हैं। 01 अप्रैल 2021 से 31 अक्टूबर 2025 तक आयोजित मेलों में 55,079 अभ्यर्थियों ने भाग लिया, लेकिन चयनित हुए सिर्फ 9,255। इसका सीधा अर्थ है कि हर 100 में से करीब 83 युवा बेरोजगार ही लौटे।
📉 रोजगार मेलों की संख्या भी घटती गई
चिंता की बात यह भी है कि रोजगार मेलों की संख्या में लगातार गिरावट आई है।
2022-23 में जहां 197 रोजगार मेले आयोजित हुए,
वहीं 2024-25 में यह संख्या घटकर सिर्फ 70 रह गई।
यानी न केवल नौकरियां कम हो रही हैं, बल्कि रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने वाले मंच भी सिमटते जा रहे हैं।
🎓 पढ़े-लिखे युवा सबसे ज्यादा हताश
ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन कर चुके युवा बड़ी उम्मीदों के साथ सेवायोजन कार्यालयों में पंजीकरण करा रहे हैं, लेकिन रोजगार मेलों से उन्हें अपेक्षित अवसर नहीं मिल पा रहे। मजबूरी में कई युवाओं को पलायन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है, तो कई बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं।
🗣️ विभाग की सफाई: आपदाओं को ठहराया जिम्मेदार
सेवायोजन विभाग के निदेशक संजय खेतवाल का कहना है कि विभाग लगातार रोजगार मेलों के माध्यम से युवाओं को रोजगार से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। उनके अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में आई आपदाओं के कारण चालू वित्तीय वर्ष में रोजगार मेलों की संख्या प्रभावित हुई है।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि सत्र समाप्त होने से पहले अधिक से अधिक रोजगार मेलों के आयोजन की योजना बनाई जा रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा युवाओं को रोजगार का लाभ मिल सके।
❓ बड़ा सवाल
आंकड़े साफ हैं—उम्मीद और हकीकत के बीच की खाई लगातार बढ़ रही है। सवाल यह है कि क्या सिर्फ रोजगार मेले ही बेरोजगारी का समाधान हैं, या अब स्थायी और ठोस रोजगार नीति की जरूरत है?
उत्तराखंड के युवाओं की निगाहें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
