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ब्रेकिंग न्यूज़ | उत्तराखंड
मानसून की मार से टूटी 4,430 जल योजनाएं, स्थायी मरम्मत का बजट अब तक अधर में।

दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो!
देहरादून। वर्ष 2025 समाप्ति की ओर है, लेकिन मानसून के दौरान क्षतिग्रस्त हुई हजारों जलापूर्ति योजनाओं की स्थायी बहाली का इंतज़ार अब भी जारी है। उत्तराखंड जल संस्थान (UJS) को अब तक इसके लिए पूरा बजट नहीं मिल सका है।
उत्तराखंड जल संस्थान के सचिव (मूल्यांकन) मनीष सेमवाल ने बताया कि हर वर्ष जुलाई–अगस्त के मानसून काल में भूस्खलन, अतिवृष्टि और बादल फटने जैसी घटनाओं से जलापूर्ति योजनाएं प्रभावित होती हैं।
👉 इस वर्ष प्रदेशभर में लगभग 4,430 जलापूर्ति योजनाएं क्षतिग्रस्त हुईं।
₹151.18 करोड़ की जरूरत, मिले सिर्फ ₹20 करोड़
जल संस्थान ने क्षतिग्रस्त योजनाओं की स्थायी बहाली के लिए ₹151.18 करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा था।
हालांकि, अब तक केवल ₹20 करोड़ की टोकन राशि ही प्राप्त हो सकी है, जबकि शेष धनराशि लंबित है।
सेमवाल के अनुसार मानसून के दौरान प्राथमिकता अस्थायी बहाली की होती है, ताकि लोगों को तत्काल पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।
“मानसून के समय स्थायी कार्य संभव नहीं होते, इसलिए अस्थायी मरम्मत कर जलापूर्ति बहाल की गई,” उन्होंने कहा।
मानसून खत्म, लेकिन स्थायी काम शुरू नहीं
मानसून समाप्त होने के बाद सभी योजनाओं की स्थायी मरम्मत की योजना थी, लेकिन वर्ष 2025 के अंत तक भी बजट जारी नहीं हो पाया, जिससे कार्य ठप पड़ा है।
वर्ल्ड बैंक से मदद की कोशिश
राज्य सरकार वर्ल्ड बैंक समेत विभिन्न वित्तीय एजेंसियों से सहायता के लिए प्रयास कर रही है। जल संस्थान लगातार शासन स्तर पर पत्राचार कर रहा है और बजट जारी होने की उम्मीद जता रहा है।
केंद्र की PDNA टीम से बातचीत, जवाब का इंतज़ार
हाल ही में केंद्र सरकार की पोस्ट डिजास्टर नीड असेसमेंट (PDNA) टीम ने जल संस्थान से क्षति और बजटीय जरूरतों पर चर्चा की थी, लेकिन अब तक कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।
पेयजल संकट की आशंका
यदि जल्द स्थायी बहाली के लिए बजट नहीं मिला, तो आने वाले समय में ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में पेयजल संकट और गहराने की आशंका जताई जा रही है।

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