








सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी, सेवानिवृत्त कर्मियों का फूटा गुस्सा।
यमुना कॉलोनी गेट पर शासनादेश की होली, पुरानी पेंशन की मांग तेज ।
दर्पण न्यूज 24/7 देहरादून।
लोक निर्माण विभाग व सिंचाई विभाग के सेवानिवृत्त कार्यप्रभारित से नियमित कर्मचारियों में उस समय भारी आक्रोश फैल गया, जब शासन द्वारा उनकी पेंशन रोक दिए जाने का शासनादेश जारी किया गया। संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले कर्मचारियों ने यमुना कॉलोनी गेट पर शासनादेश की प्रतियां फाड़कर आग के हवाले कर दीं और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
संघर्ष समिति के प्रान्तीय अध्यक्ष खेमराज सिंह कुंडरा और प्रान्तीय सचिव हिकमत सिंह नेगी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2019 में कार्यप्रभारित सेवा को जोड़ते हुए सेवानिवृत्ति लाभ देने के स्पष्ट आदेश दिए जा चुके हैं, इसके बावजूद उत्तराखंड सरकार ने मार्च 2023 में 20 प्रतिशत कर्मचारियों के पेंशनरी लाभ रोक दिए, जो न्यायालय के आदेशों की खुली अवहेलना है।
उन्होंने बताया कि शासन द्वारा गठित समिति ने भी कर्मचारियों के पक्ष में सकारात्मक रिपोर्ट दी थी। इसके बाद भी न तो सभी पात्र कर्मचारियों को पेंशन दी गई और न ही पुराने पेंशन सिस्टम (OPS) का लाभ सुनिश्चित किया गया। कर्मचारियों का आरोप है कि कैबिनेट में 80 प्रतिशत कार्मिकों को पुरानी पेंशन देने का प्रस्ताव पारित होने के बावजूद, उसे शासनादेश जारी कर बदल दिया गया, जिससे कर्मचारियों के साथ छल हुआ है।
संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, सचिव वित्त, सिंचाई व लोक निर्माण विभाग को ज्ञापन भेजकर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप सभी सेवानिवृत्त व सेवारत नियमित कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का लाभ देने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि शीघ्र न्याय नहीं मिला तो प्रदेशव्यापी आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रदर्शन में प्रदेशभर के अनेक सेवानिवृत्त कर्मचारी शामिल रहे। कर्मचारियों ने दो टूक कहा कि न्यायालय के आदेशों की अनदेखी कर सरकार न केवल कर्मचारियों बल्कि जनता के साथ भी धोखा कर रही है।
