“खनन सुधार से उत्तराखंड को चार गुना राजस्व, सात लाख परिवारों को रोजगार – शिवकुमार अग्रवाल”
दर्पण न्यूज 24/7 | रुद्रपुर।
उत्तराखंड के प्रसिद्ध उद्योगपति, समाजसेवी एवं कुमार समूह ऑफ इंडस्ट्रीज के स्वामी श्री शिवकुमार अग्रवाल ने रुद्रपुर में प्रेस वार्ता के दौरान राज्य की वर्तमान खनन एवं खनिज नीति का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि उनकी उम्र 75 वर्ष है और वर्ष 1966 से अब तक उन्हें 60 वर्षों का व्यावसायिक अनुभव प्राप्त है।
श्री अग्रवाल ने बताया कि उनकी कंपनी एलएससी इन्फ्राटेक लिमिटेड पिछले 35 वर्षों से उत्तराखंड में खनिज एवं खनन क्षेत्र में कार्य कर रही है और यह एशिया की सबसे बड़ी खनिज प्रसंस्करण कंपनी है। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और आंध्र प्रदेश में कंपनी की 10 इकाइयां हैं, जबकि पूरे देश में कुल 16 व्यावसायिक इकाइयां कार्यरत हैं। साथ ही लगभग 2000 सदस्यों की उनकी पारिवारिक पेशेवर भागीदारी संस्था है।
उन्होंने कहा कि समाज में उत्तराखंड की खनिज नीति को लेकर हो रही आलोचनाओं के बीच यह तथ्य है कि बीते डेढ़ वर्ष में खनन से उत्तराखंड सरकार को मिलने वाला राजस्व 300 करोड़ रुपये से बढ़कर 1200 करोड़ रुपये हो गया है। इससे पहले सरकारी विभागों एवं व्यवस्था की कमजोरियों के कारण खनिजों की चोरी एवं रिसाव हो रहा था, जबकि स्टोन क्रशिंग उद्योग को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा था।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में उत्तराखंड में लगभग 400 स्टोन क्रशर इकाइयां संचालित हो रही हैं, जो राज्य का सबसे अधिक रोजगार देने वाला उद्योग है। इससे लगभग 7 लाख परिवारों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ है।
स्टोन क्रशिंग उद्योग से रॉयल्टी, वन पारगमन शुल्क, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), आयकर तथा परिवहन कर (आरटीओ कर) के माध्यम से सरकार को प्रतिवर्ष लगभग 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हो रहा है। इसमें वस्तु एवं सेवा कर से 4500 करोड़ रुपये, आबकारी शुल्क से 2300 करोड़ रुपये तथा परिवहन कर से 1600 करोड़ रुपये से अधिक की प्राप्ति हो रही है।
श्री अग्रवाल ने बताया कि खनन विभाग द्वारा निविदा प्रक्रिया अपनाने के लिए उनसे संपर्क किया गया था, लेकिन उन्होंने इसे अत्यंत कठिन कार्य बताते हुए इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुखिया माननीय पुष्कर सिंह धामी एवं खनन विभाग की टीम ने इस क्षेत्र में बड़ा सुधार (रिफॉर्म) किया है, जिससे समाज, उद्योग एवं राज्य के हित में बेहतर नीति बनी है। वर्तमान खनिज नीति उत्तराखंड के अलावा हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में भी लागू की गई है।
उन्होंने बताया कि इससे विभिन्न विभागों में भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं पर अंकुश लगा है। खनन क्षेत्र अव्यवस्थित से व्यवस्थित हुआ है, खनन कार्य व्यवस्थित एवं पेशेवर बना है। परिवहन और उद्योग से जुड़े व्यापारियों की परेशानियां कम हुई हैं और उनका लाभ बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के स्टोन क्रशर स्वामियों ने अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से कोर-सैंड (धूल रेता) तथा एम-सैंड (निर्मित रेत) बनाने की तकनीक विकसित की है। आज देश के अन्य राज्यों ने उनकी कंपनी एलएससी इन्फ्राटेक से प्रस्तुति लेकर अपने राज्यों में एम-सैंड नीति लागू की है।
उन्होंने बताया कि खनिज बाजार जो पहले सिमट चुका था, सुधारों के बाद उसका क्षेत्र उत्तर प्रदेश तक 150 किलोमीटर तक बढ़ गया है, जो एक बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस उद्योग से उत्पन्न होने वाला लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का राजस्व तथा श्रमिकों, परिवहन और उद्योग से होने वाली आय का अधिकांश भाग उत्तराखंड में ही खर्च होता है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलता है।
अंत में उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि जो स्टोन क्रशर इकाइयां 40 वर्ष पहले स्थापित हुई थीं और अब शहरों की आबादी के बीच आ गई हैं, उन्हें आबादी से बाहर स्थानांतरित किया जाए तथा शहरों के बाहर सरकारी भूमि पर स्टोन क्रशर क्षेत्र (जोन) घोषित किए जाएं।
उन्होंने दोहराया कि उत्तराखंड की वर्तमान खनिज नीति समाज, उद्योग और प्रदेश के हित में सर्वोत्तम नीति है और सरकार को इस क्षेत्र पर भविष्य में भी पूरा ध्यान देना चाहिए।
