बिग ब्रेकिंग | कुमाऊं में बड़ी कार्रवाई
“वर्दी पर गिरी गाज: लैंड फ्रॉड केस में भोटियापड़ाव चौकी के एसआई सस्पेंड!”
धनंजय गिरी प्रकरण में आईजी का कड़ा एक्शन, एसआईटी को फ्री हैंड!
दर्पण न्यूज 24/7 संवाददाता | हल्द्वानी
कुमाऊं परिक्षेत्र में चर्चित भूमि धोखाधड़ी प्रकरण को लेकर पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। धनंजय गिरी से जुड़े लैंड फ्रॉड मामले में लापरवाही और मिलीभगत के आरोपों के चलते भोटियापड़ाव चौकी में तैनात उप निरीक्षक अनिल कुमार को आईजी कुमाऊं परिक्षेत्र रिद्धिम अग्रवाल ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई को महकमे में कड़ा संदेश माना जा रहा है कि अब लैंड फ्रॉड मामलों में ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।
आईजी रिद्धिम अग्रवाल ने बताया कि बीते दो महीनों में अभियुक्त धनंजय गिरी के खिलाफ कई पीड़ितों ने जमीन दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी की शिकायतें कुमाऊं परिक्षेत्र कार्यालय में दर्ज कराई थीं। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि विवेचक द्वारा समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे अभियुक्त को लाभ मिला। इसी लापरवाही को गंभीर मानते हुए तत्काल निलंबन की कार्रवाई की गई है।
भूमि धोखाधड़ी मामलों पर शिकंजा कसने के लिए शासन स्तर पर गठित लैंड फ्रॉड समिति गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में सक्रिय है। परिक्षेत्र स्तर पर विशेष जांच टीम (एसआईटी) को भी पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है। वहीं, जिलों में पहले से गठित जिला स्तरीय एसआईटी की कार्यप्रणाली संतोषजनक न पाए जाने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। अब नए भूमि धोखाधड़ी मामलों की प्रारंभिक जांच संबंधित क्षेत्राधिकारी द्वारा की जाएगी।
आईजी ने स्पष्ट किया कि अभियुक्त द्वारा धोखाधड़ी से अर्जित धन को न्यायालय के माध्यम से पीड़ितों को वापस दिलाने की कार्रवाई की जाएगी। एसआईटी को इस संबंध में साफ दिशा-निर्देश दे दिए गए हैं। जिन पीड़ितों की शिकायतें अब तक दर्ज नहीं हो पाई हैं, या जिनके साथ धनंजय गिरी अथवा उसके सहयोगियों ने धोखाधड़ी की है, वे परिक्षेत्रीय मोबाइल नंबर 9411110057 पर संपर्क कर सकते हैं या एसआईटी प्रभारी मनोज कत्याल, पुलिस अधीक्षक नगर हल्द्वानी से सीधे संपर्क करें।
आईजी ने आम जनता से अपील की कि किसी भी व्यक्ति, निजी फंड या योजना में निवेश से पहले उसकी वैधानिक स्थिति और सरकारी अनुमति की पूरी जांच जरूर करें। उन्होंने दो टूक कहा कि भूमि धोखाधड़ी करने वालों और उन्हें संरक्षण देने वालों—दोनों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
