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हाईकोर्ट–सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टकराव, 16 हजार पेंशनर्स की रैली स्थगित।
ओपीएस बहाली की जंग में नई रणनीति, सरकार पर पेंशनरों को कोर्ट की दहलीज पर धकेलने का आरोप।
देहरादून। सेवानिवृत्त कार्यप्रभारित से नियमित कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति (सिंचाई विभाग व लोक निर्माण विभाग) उत्तराखंड ने 26 पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर 18 फरवरी 2026 को प्रस्तावित रैली को स्थगित कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष खेमराज सिंह कुन्दरा ने कहा कि सरकार द्वारा उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों की भावना के विपरीत कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे कर्मचारियों व पेंशनरों को बार-बार न्यायालय की शरण लेने को मजबूर होना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि कार्यप्रभारित से नियमित होकर सेवानिवृत्त हुए करीब 16 हजार पेंशनर्स और लगभग 1400 कार्यरत कर्मचारियों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। पेंशन और अन्य देयों में देरी के कारण कई परिवार भुखमरी की कगार पर हैं। ऐसी स्थिति में संगठन ने आंदोलन की रणनीति में बदलाव करते हुए कानूनी लड़ाई को और तेज करने का निर्णय लिया है।
प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार और शासन की नीतियां कर्मचारी-पेंशनर विरोधी हैं। न्यायालय के निर्णयों की अनदेखी कर प्रशासनिक आदेशों से अधिकारों को सीमित किया जा रहा है। उन्होंने चेताया कि यदि पुरानी पेंशन बहाली और लंबित देयों पर जल्द ठोस फैसला नहीं हुआ, तो संगठन प्रदेशव्यापी आंदोलन के साथ-साथ न्यायिक मंचों पर निर्णायक लड़ाई लड़ेगा।
नई रणनीति पर काम तेज
संगठन ने संकेत दिए हैं कि आंदोलन के अगले चरण में कानूनी विकल्पों के साथ जनजागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। सरकार पर दबाव बनाने के लिए सभी विपक्षी दलों, कर्मचारी संगठनों और पेंशनर संघों से एकजुटता की अपील की गई है।

दर्पण न्यूज 24/7