खबरें शेयर करें -

बिंदुखत्ता की निर्णायक हुंकार—हजारों की ऐतिहासिक महारैली ने सरकार को दी सीधी चेतावनी, जल्द राजस्व गांव की अधिसूचना जारी न किए जाने पर किया आर-पार के संघर्ष का ऐलान!
दर्पण न्यूज 24/7 लालकुआँ।
बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की वर्षों पुरानी मांग ने बुधवार को जनज्वार का रूप ले लिया। हजारों लोगों की मौजूदगी में निकली ऐतिहासिक महारैली ने साफ संकेत दे दिया कि अब यह आंदोलन निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। जनसैलाब ने एक स्वर में राजस्व गांव की अधिसूचना जारी करने की मांग दोहराई और सरकार को शीघ्र निर्णय लेने की चेतावनी दी।
रैली के समापन पर प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल को ज्ञापन सौंपा और तत्काल अधिसूचना जारी करने की मांग रखी।
जनसभा को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा,
“बिंदुखत्ता की जनता दशकों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही है। अब सरकार को जनभावनाओं का सम्मान करते हुए तुरंत राजस्व गांव की अधिसूचना जारी करनी चाहिए। जनता की आवाज को अनसुना करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ होगा।”
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा,
“यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो यह आंदोलन और व्यापक रूप लेगा। बिंदुखत्ता के विकास और हक की लड़ाई को हम अंजाम तक पहुंचाकर रहेंगे। अब टालमटोल नहीं चलेगी।”
वरिष्ठ नेता हरीश दुर्गापाल ने कहा,
“राजस्व गांव का दर्जा मिलते ही भूमि, पट्टों और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान संभव होगा। यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का प्रश्न है।”
भाकपा (माले) के वरिष्ठ नेता इंद्रेश मैखुरी ने अपने धारदार संबोधन में सरकार को सीधे चेतावनी देते हुए कहा,
“बिंदुखत्ता के लोगों को वर्षों से अधिकारों से वंचित रखा गया है। यदि सरकार ने जल्द अधिसूचना जारी नहीं की तो सड़क से सदन तक संघर्ष तेज होगा। जनता अब प्रतीक्षा नहीं, निर्णय चाहती है।”
संघर्ष के अग्रणी चेहरा बहादुर सिंह जंगी ने हुंकार भरते हुए ऐलान किया,
“जब तक राजस्व गांव की अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। यह लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है—या अधिकार मिलेगा, या संघर्ष और तेज होगा।”
ज्ञापन प्राप्त करते हुए जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कहा कि प्राप्त ज्ञापन को आज ही शासन को प्रेषित किया जाएगा और शासन से मिले निर्देशों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
महारैली के दौरान पूरे क्षेत्र में जोश, अनुशासन और एकजुटता का अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। प्रशासन की मुस्तैदी के बीच कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।
अब बिंदुखत्ता की निगाहें सरकार के फैसले पर टिकी हैं। जनता ने स्पष्ट कर दिया है—यह आंदोलन अब प्रतीक्षा नहीं, परिणाम चाहता है।

उत्तराखंड