बिन्दुखत्ता राजस्व गांव की “हुंकार से गूंजा लालकुआं !
राजस्व गांव की मांग पर उमड़ा जनसैलाब!
दर्पण न्यूज 24/7 लालकुआँ।
राजस्व गांव के दर्जे की मांग को लेकर बिंदुखत्ता में उमड़ा जनसैलाब इस बार इतिहास रच गया। हजारों लोगों की मौजूदगी ने साफ संदेश दिया कि यह आंदोलन अब जनअधिकार की निर्णायक लड़ाई बन चुका है।
सभा को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि बिंदुखत्ता की आवाज को अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने चेताया कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन और व्यापक रूप लेगा।
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हरेंद्र बोरा ने जोरदार शब्दों में कहा,
“बिंदुखत्ता के लोगों ने वर्षों तक इंतजार किया है। अब सरकार को बिना किसी देरी के राजस्व गांव की अधिसूचना जारी करनी चाहिए। यह पूरे क्षेत्र के सम्मान और हक की लड़ाई है।”
इसके बाद वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हेमवती नन्दन दुर्गापाल ने अपने संबोधन में कहा,
“राजस्व गांव का दर्जा केवल प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का सवाल है। इससे भूमि, पट्टा और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान संभव होगा। हम इस जनआंदोलन को अंजाम तक पहुंचाकर रहेंगे।”
कांग्रेस नेता नितिन पंत ने कहा, “अब संघर्ष अंतिम चरण में है, पीछे हटने का सवाल ही नहीं।”
प्रमोद कालोनी ने कहा, “जनभावनाओं का सम्मान करना सरकार का दायित्व है।”
संध्या डालाकोटी ने कहा, “महिलाएं भी इस आंदोलन में पूरी ताकत के साथ खड़ी हैं।”
संघर्ष समिति से जुड़े उमेश भट्ट ने कहा, “यह अधिकार की लड़ाई है, जो हर हाल में जीती जाएगी।”
बलवंत सिंह बिष्ट ने कहा, “हमारी एकता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।”
बसंत पांडे ने स्पष्ट किया, “जनजागरण और तेज किया जाएगा।”
बीना जोशी ने कहा, “यह सम्मान और भविष्य की लड़ाई है, जिसे हम जीतकर रहेंगे।”
सभा में उमेश कबड़वाल, शेखर जोशी, सरस्वती एरी, तुलसी बिष्ट, कैलाश दुमका, मोहन कुड़ाई, पुष्कर दानू और हरीश बिसोती सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी रही।
राजस्व गांव संघर्ष समिति के संयोजक कुंदन सिंह मेहता ने सभी नेताओं और क्षेत्रवासियों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बिंदुखत्ता की यह एकजुटता ही आंदोलन की असली ताकत है।
जोश, अनुशासन और संकल्प से भरी इस ऐतिहासिक रैली ने संकेत दे दिया है कि बिंदुखत्ता की लड़ाई अब निर्णायक परिणाम की ओर बढ़ रही है।
