ऊर्जा डेटा पर सख्ती: राष्ट्रीय सुरक्षा दायरे में तेल-गैस जानकारी, कंपनियों को रोजाना रिपोर्टिंग अनिवार्य!
सरकार का बड़ा फैसला—उत्पादन, आयात, भंडार और खपत के आंकड़े देना होगा जरूरी, गैस वितरक भी दायरे में!
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो, नई दिल्ली।
देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। सरकार ने तेल और गैस क्षेत्र से जुड़ी सूचनाओं को अब राष्ट्रीय सुरक्षा के दायरे में शामिल करते हुए सभी संबंधित कंपनियों के लिए विस्तृत परिचालन जानकारी साझा करना अनिवार्य कर दिया है।
पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी “पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस (सूचना प्रदान करना) आदेश, 2026” के तहत सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की रिफाइनरी कंपनियों, द्रवीकृत प्राकृतिक गैस आयातकों, पाइपलाइन संचालकों, शहरी गैस वितरण इकाइयों और पेट्रोरसायन कंपनियों को अब नियमित—और कई मामलों में दैनिक—आधार पर आंकड़े उपलब्ध कराना होगा।
इस आदेश के तहत उत्पादन, आयात, निर्यात, भंडार स्तर, आपूर्ति, खपत और उपयोग से जुड़े विस्तृत आंकड़े पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ को देने होंगे। सरकार का लक्ष्य एक केंद्रीकृत और वास्तविक समय पर आधारित आंकड़ा प्रणाली तैयार करना है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला पर लगातार निगरानी रखी जा सके।
सरकार ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है। खासकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने से आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है, क्योंकि बड़ी मात्रा में तेल और गैस इसी मार्ग से भारत पहुंचती रही है।
हालांकि, भारत ने रूस, पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका और लातिनी अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से आंशिक आपूर्ति सुनिश्चित की है, लेकिन खाड़ी देशों से कमी के चलते औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में गैस और एलपीजी की उपलब्धता प्रभावित हुई है।
मंत्रालय का कहना है कि इस नई व्यवस्था से आपूर्ति में किसी भी बाधा की स्थिति में त्वरित निर्णय लेना आसान होगा। बिजली उत्पादन, उर्वरक उद्योग और घरेलू एलपीजी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्राथमिकता देने में भी मदद मिलेगी।
यह आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत जारी किया गया है, जो केंद्र सरकार को आवश्यक वस्तुओं से जुड़ी जानकारी मांगने का अधिकार देता है।
अधिकारियों के मुताबिक, ऊर्जा सुरक्षा अब केवल संसाधनों की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला की पारदर्शिता और वास्तविक समय की निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है।
नए नियमों के तहत कंपनियों को अपनी आंकड़ा रिपोर्टिंग प्रणाली को आधुनिक और सक्षम बनाना होगा, ताकि सख्त नियामक ढांचे का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। यह कदम भारत की ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली को वैश्विक झटकों के प्रति अधिक मजबूत और लचीला बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
