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लालकुआं में भाजपा कर सकती है बड़ा राजनीतिक प्रयोग!
“नारी शक्ति” और ओबीसी समीकरणों के बीच नए चेहरों की एंट्री से तेज हुई सियासी हलचल।
दर्पण न्यूज 24/7 लालकुआं।
लालकुआं विधानसभा में वर्ष 2027 के चुनाव को लेकर भाजपा के भीतर राजनीतिक सरगर्मियां लगातार तेज होती जा रही हैं। टिकट की संभावित दौड़ में जहां कई पुराने और दिग्गज नेताओं के नाम चर्चा में बने हुए हैं, वहीं अब पार्टी के भीतर कुछ “नए राजनीतिक प्रयोग” की संभावनाओं को लेकर भी कयास लगाए जाने लगे हैं। खास बात यह है कि इस बार भाजपा केवल पारंपरिक चेहरों तक सीमित रहने के बजाय सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की रणनीति पर काम करती दिखाई दे रही है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा आगामी चुनाव में “नारी शक्ति बंदन” अभियान और महिला सशक्तिकरण की थीम को मजबूत करने के लिए लालकुआं से महिला चेहरे पर भी बड़ा दांव खेल सकती है। इसी क्रम में महिला नेत्री आनंदी गड़िया की बढ़ती सक्रियता को बेहद अहम माना जा रहा है। क्षेत्र में सामाजिक कार्यक्रमों, महिला समूहों और संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी लगातार मौजूदगी ने उन्हें अचानक राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में ला खड़ा किया है।
वहीं दूसरी ओर भाजपा ओबीसी वोट बैंक को और मजबूती से साधने की रणनीति पर भी काम करती नजर आ रही है। ऐसे में भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश मंत्री देवेंद्र सिंह बिष्ट “देबू” की बढ़ती सक्रियता को भी राजनीतिक जानकार बेहद महत्वपूर्ण संकेत मान रहे हैं। संगठनात्मक पकड़, जमीनी कार्यकर्ताओं से करीबी और ओबीसी वर्ग में उनकी सक्रिय भूमिका ने उनकी दावेदारी को भी चर्चा में ला दिया है।
सूत्रों की मानें तो पार्टी नेतृत्व इस बार लालकुआं सीट पर केवल व्यक्तिगत प्रभाव या पुराने राजनीतिक समीकरणों के आधार पर फैसला नहीं करना चाहता, बल्कि महिला, युवा और ओबीसी समीकरणों को साथ लेकर “नए सामाजिक संतुलन” की रणनीति तैयार की जा रही है। यही कारण है कि आनंदी गड़िया और देवेंद्र सिंह बिष्ट देबू जैसे नाम अचानक तेजी से राजनीतिक चर्चाओं में उभरते दिखाई दे रहे हैं।
फिलहाल वर्तमान विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट, पूर्व विधायक नवीन दुम्का, हिंदूवादी नेता कमल मुनि, पूर्व जिला पंचायत सदस्य उमेश शर्मा, कमलेश चंदोला तथा भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के भतीजे दीपेंद्र कोश्यारी जैसे दिग्गज नाम पहले से संभावित दावेदारों की सूची में शामिल माने जा रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच नए चेहरों की बढ़ती चर्चा ने पार्टी के अंदरूनी समीकरणों को और दिलचस्प बना दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि टिकट को लेकर बड़े नेताओं के बीच सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण साबित होता है, तो भाजपा “सरप्राइज कार्ड” खेलते हुए किसी ऐसे चेहरे को आगे ला सकती है जो संगठनात्मक रूप से सक्रिय होने के साथ-साथ महिला, युवा और ओबीसी वर्ग में संतुलन बनाने की क्षमता रखता हो।
लालकुआं विधानसभा का चुनावी इतिहास हमेशा से रोचक और अप्रत्याशित फैसलों के लिए जाना जाता रहा है। ऐसे में भाजपा के भीतर चल रही नई चर्चाओं ने यह संकेत जरूर दे दिए हैं कि 2027 का चुनाव केवल पुराने चेहरों के भरोसे नहीं लड़ा जाएगा। पार्टी किस नए फार्मूले और किस चेहरे के साथ मैदान में उतरती है, इस पर अब पूरे क्षेत्र की नजरें टिक गई हैं।

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