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ठेके तक चमचमाती सड़क, जनता के हिस्से गड्ढे! लालकुआँ में विकास की सच्चाई पर उठे सवाल!

दर्पण न्यूज 24/7 लालकुआँ। चुनावी मंचों से विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन हल्दूचौड़ आईओसी डिपो से हरिपुर बच्ची लिंक सड़क की तस्वीर उन दावों की जमीनी हकीकत बयां करती है। यह सड़क आज केवल बदहाल मार्ग नहीं, बल्कि लालकुआँ विधानसभा में विकास की प्राथमिकताओं पर बड़ा सवाल बन चुकी है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हाईवे से करीब 200 मीटर दूर स्थित सरकारी देशी शराब की दुकान तक शानदार आरसीसी सड़क बनाई गई है, लेकिन उसके आगे हजारों लोगों की जीवनरेखा बनी सड़क गड्ढों, कीचड़ और जलभराव में तब्दील है। इस विरोधाभास ने ग्रामीणों को यह सवाल पूछने पर मजबूर कर दिया है कि क्या विकास की सीमा शराब के ठेके तक ही तय कर दी गई है?

करीब 15 से 16 गांवों और लगभग 20 हजार की आबादी इसी मार्ग पर निर्भर है। स्कूली बच्चे, मरीज, महिलाएं, किसान और रोज़गार के लिए आने-जाने वाले लोग प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। बरसात में सड़क तालाब बन जाती है, भारी वाहन गड्ढों को और गहरा कर देते हैं और हर दिन किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है।

पूर्व प्रधान हरेन्द्र असगोला, ग्राम प्रधान ललित सनवाल, क्षेत्र पंचायत सदस्य चंपा पांडे, समाजसेवी प्रेम दुमका सहित अनेक ग्रामीणों ने साफ कहा कि वर्षों से ज्ञापन दिए गए, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मुलाकातें हुईं, लेकिन नतीजा शून्य रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय वादे किए जाते हैं और चुनाव बीतते ही जनता को उसके हाल पर छोड़ दिया जाता है।

क्षेत्र में स्टोन क्रेशरों की भरमार है, भारी वाहनों की आवाजाही लगातार होती है और खनन से राजस्व भी आता है। इसके बावजूद सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र की सड़कें बदहाल हैं। सड़क किनारे अवैध अतिक्रमण भी बढ़ता गया, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों के मन में यह सवाल और गहरा हो गया है कि आखिर प्रशासन की प्राथमिकता क्या है?

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया, जबकि शराब से जुड़े ढांचे तक बेहतर पहुंच दिखाई देती है। यही कारण है कि अब विकास के दावों पर जनता सवाल उठा रही है।

2027 का विधानसभा चुनाव अब केवल राजनीतिक मुकाबला नहीं होगा, बल्कि जनप्रतिनिधियों के कामकाज की परीक्षा भी होगा। जनता यह देखेगी कि पांच वर्षों में किसने केवल आश्वासन दिए और किसने जमीन पर काम किया। यदि हजारों लोगों की जीवनरेखा बनी सड़क आज भी बदहाल है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि विकास के दावे आखिर किसके लिए किए जा रहे थे?

लालकुआँ की यह सड़क अब केवल सड़क नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही का प्रतीक बन चुकी है। आने वाले चुनाव में इसका जवाब जनता अपने वोट से देगी।

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