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मेडिकल लीव, प्रमोशन और गृह जनपद वापसी! सहकारिता विभाग में ‘मलाईदार’ खेल पर उठे बड़े सवाल!

नियमों को ताक पर रखकर हुआ अटैचमेंट या सिस्टम की मेहरबानी? विभाग में चर्चाओं का बाजार गर्म, जांच की आहट।
देहरादून/ऊधमसिंह नगर। उत्तराखंड के सहकारिता विभाग में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक अधिकारी ने पहले तबादले के बाद मेडिकल अवकाश का सहारा लिया, फिर कथित तौर पर प्रभावशाली अटैचमेंट के जरिए अपने गृह जनपद में वापसी कर ली। इतना ही नहीं, इसी दौरान उन्हें पदोन्नति भी मिल गई और मलाईदार जिम्मेदारियां भी सौंप दी गईं।
चर्चाओं के केंद्र में अपर विकास अधिकारी (सहकारिता) के पद पर संबद्ध अधिकारी प्रतिभा गोयल हैं। बताया जा रहा है कि उनकी नियुक्ति मृतक आश्रित कोटे से हुई थी और पहली तैनाती चम्पावत जिले में सहायक विकास अधिकारी (सहकारिता) के रूप में हुई। आरोप है कि तैनाती के कुछ समय बाद उन्होंने मेडिकल लीव ले ली और उसी दौरान उच्च अधिकारियों की अनुमति से उनका अटैचमेंट ऊधमसिंह नगर में कर दिया गया।
यहीं से सवालों का सिलसिला शुरू होता है। विभागीय सूत्रों का दावा है कि नियमों की अनदेखी करते हुए पहले उन्हें गृह जनपद में संबद्ध किया गया, फिर सहायक विकास अधिकारी से पदोन्नत कर अपर विकास अधिकारी (सहकारिता) बना दिया गया। इतना ही नहीं, उन्हें दक्षिणी किच्छा समिति के सचिव का अतिरिक्त प्रभार भी सौंप दिया गया, जिसे विभाग का महत्वपूर्ण और प्रभावशाली दायित्व माना जाता है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि किसी कर्मचारी का तबादला प्रशासनिक आवश्यकता के तहत किया गया था, तो मेडिकल अवकाश के दौरान ही उसी कर्मचारी को गृह जनपद में अटैच करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? क्या विभागीय नियम इसकी अनुमति देते हैं? यदि नहीं, तो किसके आदेश पर यह पूरी प्रक्रिया पूरी की गई?
विभाग के भीतर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तीखी चर्चाएं हैं। सूत्रों के अनुसार, कथित रूप से नियमों के विपरीत किए गए अटैचमेंट और पदोन्नति की समीक्षा शुरू हो चुकी है तथा आवश्यकता पड़ने पर संबंधित आदेशों को निरस्त करने की भी तैयारी बताई जा रही है।
यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी जिन्होंने मेडिकल अवकाश, अटैचमेंट और पदोन्नति की इस पूरी प्रक्रिया को मंजूरी दी।
हालांकि, इस पूरे मामले में अभी तक सहकारिता विभाग या संबंधित अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यदि इस प्रकरण से जुड़े नए दस्तावेज या तथ्य सामने आते हैं, तो उनका भी खुलासा किया जाएगा।

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