








गौला के बहाव में बहता भरोसा! 2027 से पहले विधायक के गढ़ में क्यों उठने लगे सवाल?
जिस महिला ने चुनाव में समर्थन का दावा किया, वही अब कह रही है “हमने विधायक बनाया है, अब हमारे बीच आना पड़ेगा”!
लालकुआं। गौला नदी का तेज बहाव इन दिनों बिंदुखत्ता में केवल सिर्फ जमीन नहीं काट रहा, बल्कि नदी किनारे बसे परिवारों की चिंता और जनप्रतिनिधियों के प्रति बढ़ती नाराजगी को भी सामने ला रहा है। लगातार हो रहे भू-कटाव की जद में आ रहे घरों और निजी भूमि को बचाने की मांग अब धीरे-धीरे राजनीतिक सवाल का रूप लेती दिखाई दे रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो इस बदलते माहौल की तस्वीर पेश कर रहा है, जिसमें खुद को जानकी बताने वाली एक महिला स्थानीय विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट पर गंभीर सवाल उठाती नजर आ रही हैं।
महिला का दावा है कि विधानसभा चुनाव के दौरान वह विधायक के समर्थन में सक्रिय रही थीं और घर-घर जाकर उनके पक्ष में वोट मांगने के साथ अपने स्तर से करीब 357 वोट दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लेकिन अब वही महिला गौला नदी के लगातार बढ़ते कटाव को लेकर विधायक से सवाल करती दिखाई दे रही है। उनका कहना है कि वह इस समस्या को लेकर विधायक के पास पहुंची थीं, लेकिन कथित तौर पर उनसे उनके बच्चों की नौकरी के संबंध में आने की बात कही गई।
महिला के अनुसार, यह मामला उनके बच्चों की नौकरी का नहीं, बल्कि गौला नदी के कटाव से खतरे में आए लोगों के घरों और जमीन का है। उनका कहना है कि जब नदी लगातार जमीन काट रही हो और परिवारों के सामने अपना आशियाना तथा पुश्तैनी भूमि बचाने का संकट खड़ा हो, तब उनकी पहली चिंता सुरक्षा और जमीन बचाने की होनी चाहिए।
वायरल वीडियो में महिला बेहद आक्रोशित अंदाज में यह कहती सुनाई दे रही हैं कि “हमने बनाया है विधायक, अब हमारे बीच आना पड़ेगा।” महिला का यह बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और क्षेत्र में इसे लेकर राजनीतिक हलकों में भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
दरअसल, किसी जनप्रतिनिधि के प्रति उस समय का समर्थन और बाद में उसी जनप्रतिनिधि से सार्वजनिक रूप से सवाल करना स्थानीय राजनीति में बदलते जनभावना संकेत के तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि महिला द्वारा चुनाव के दौरान वोट दिलाने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट की ओर से वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों पर उनका पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
गौला नदी का कटाव यदि इसी तरह जारी रहा तो आने वाले दिनों में यह केवल भू-कटाव या बाढ़ सुरक्षा का प्रशासनिक मामला नहीं रहेगा। प्रभावित परिवारों के लिए यह उनके घर, जमीन और भविष्य की सुरक्षा का सवाल है। ऐसे में यदि समय रहते स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो ग्रामीणों की नाराजगी और अधिक मुखर हो सकती है।
यही वह स्थिति है जो 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है। अभी चुनाव में समय है और मौजूदा नाराजगी को सीधे चुनावी परिणाम से जोड़ना जल्दबाजी होगी, लेकिन यदि गौला कटाव का मुद्दा लंबे समय तक बना रहा और प्रभावित परिवारों को राहत नहीं मिली तो विपक्ष के लिए यह एक बड़ा स्थानीय मुद्दा बन सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन और जनप्रतिनिधि समय रहते गौला नदी के कटाव से प्रभावित परिवारों को सुरक्षा का भरोसा दिला पाएंगे? क्योंकि चुनाव के समय जनता के बीच पहुंचकर समर्थन मांगना राजनीति का हिस्सा है, लेकिन संकट के समय उसी जनता के बीच खड़ा होना जनप्रतिनिधि की असली परीक्षा माना जाता है।
फिलहाल गौला नदी की धार लगातार जमीन काट रही है और उसके साथ लोगों की चिंता भी बढ़ रही है। अब देखना यह होगा कि इस बढ़ते आक्रोश को समाधान मिलता है या यह आने वाले समय में एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेता है।
गौला की धार आज जमीन काट रही है, लेकिन सवाल यह है कि 2027 तक क्या यह सियासी समीकरण भी काट पाएगी?
दर्पण न्यूज 24/7 की नजर इस पूरे मामले पर बनी हुई है।वीडियो साभार समय विनोद
