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शिलान्यास को चार माह बीते, राधाबंगर लिंक मार्ग की बदहाली जस की तस; सोशल मीडिया पर ग्रामीणों ने खोला विकास का पिटारा!

हल्दूचौड़। कहते हैं कि ऊंची दुकान, फीका पकवान… राधाबंगर लिंक मार्ग के मामले में यह कहावत कुछ हद तक सटीक बैठती नजर आ रही है। सड़क सुधारीकरण के लिए करीब चार माह पहले पूरे तामझाम के साथ शिलान्यास तो हो गया, लेकिन सड़क आज भी अपने कायाकल्प की बाट जोह रही है। हां, गांव के सिरहाने में लगा शिलापट जरूर शान से खड़ा होकर विकास की कहानी बयां कर रहा है।

राज्य योजना के तहत लालकुआं विधानसभा क्षेत्र के राधाबंगर लिंक मार्ग के 1.100 किलोमीटर हिस्से के पीसी द्वारा सुधारीकरण के लिए 14.50 लाख रुपये की लागत स्वीकृत होने का उल्लेख शिलापट पर किया गया है। कार्यदायी संस्था निर्माण खंड लोक निर्माण विभाग, हल्द्वानी है। एक मार्च 2026 को लालकुआं विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट के कर कमलों द्वारा कार्य का शिलान्यास किया गया था।

शिलान्यास के समय ग्रामीणों को उम्मीद जगी थी कि अब सड़क के दिन बहुरेंगे और बदहाल मार्ग की तस्वीर बदलेगी। लेकिन चार महीने बीतने के बाद भी सड़क की हालत में अपेक्षित सुधार नहीं होने से ग्रामीणों की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। सड़क सुधारीकरण का काम कब शुरू होगा, यह सवाल अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

सड़क की बदहाली को लेकर ग्रामीणों ने अब सोशल मीडिया का सहारा लिया है। सड़क की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लोग जिम्मेदारों का ध्यान इस ओर खींच रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नौ दिन चले अढ़ाई कोस वाली स्थिति आखिर कब तक चलेगी। शिलान्यास के बाद काम शुरू होने की उम्मीद थी, लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि विकास की गाड़ी सड़क पर चलने के बजाय शिलापट के पास ही खड़ी है।

ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि जब सड़क का काम शुरू करने में इतना वक्त लगना था तो शिलान्यास की इतनी जल्दी क्या थी? ग्रामीणों का तंज है कि नाम बड़े और दर्शन छोटे वाली कहावत यहां चरितार्थ होती दिख रही है। शिलापट अपनी जगह मौजूद है, मगर जिस सड़क के सुधारीकरण का ऐलान किया गया था, वह आज भी अपनी बदहाली का दर्द झेल रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि शिलान्यास विकास कार्य की शुरुआत का प्रतीक होता है, लेकिन यदि शिलान्यास के बाद भी काम धरातल पर न उतरे तो लोगों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है। अब ग्रामीणों की निगाहें लोक निर्माण विभाग और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं कि आखिर ऊंट किस करवट बैठता है और सड़क सुधारीकरण का काम कब शुरू होता है।

फिलहाल राधाबंगर में शिलापट मुस्कुरा रहा है और सड़क इंतजार कर रही है। ग्रामीणों की सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उठ रही आवाज अब जिम्मेदारों के कानों तक कब पहुंचेगी और सड़क के अच्छे दिन कब आएंगे, यह देखने वाली बात होगी।

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