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जमीन धोखाधड़ी और पॉक्सो मामले में अदालत का सख्त रुख, दोनों आरोपियों की जमानत खारिज।

आठ लाख रुपये लेकर दो साल तक रजिस्ट्री के नाम पर टालमटोल का आरोप, हाईकोर्ट की शर्त से बचने की कोशिश पर कोर्ट ने जताई नाराजगी; नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को भी नहीं मिली राहत।

 

नैनीताल। जिले में दो गंभीर मामलों में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। जिला एवं सत्र न्यायाधीश नैनीताल प्रशांत जोशी ने जमीन धोखाधड़ी के आरोपी प्रॉपर्टी डीलर रोशन लाल की जमानत अर्जी निरस्त कर दी, जबकि अपर जिला जज/एफटीएससी (पॉक्सो एक्ट) नैनीताल के विशेष न्यायाधीश सुधीर तोमर ने नाबालिग पीड़िता से दुष्कर्म के आरोपी नरेश पाण्डे की प्रथम जमानत याचिका खारिज कर दी। दोनों मामलों में अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) सुशील कुमार शर्मा ने जमानत का कड़ा विरोध किया।

आठ लाख रुपये लेने के बाद दो साल तक रजिस्ट्री के नाम पर करता रहा टालमटोल

पहला मामला भवाली क्षेत्र के मेहरागांव, नौला से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार 18 अप्रैल 2026 को थाना भवाली में दर्ज रिपोर्ट में शीला मेहता ने आरोप लगाया कि प्रॉपर्टी डीलर रोशन लाल पुत्र मनोहर लाल ने मेहरागांव में जमीन बेचने का सौदा 26 लाख रुपये में तय किया था। एग्रीमेंट के दौरान आरोपी ने उनसे आठ लाख रुपये नकद ले लिए, लेकिन इसके बाद रजिस्ट्री कराने के नाम पर करीब दो साल तक टालमटोल करता रहा।

पीड़िता के अनुसार जब उन्होंने मौके पर जाकर जमीन के संबंध में जानकारी जुटाई तो उन्हें पता चला कि जिस भूमि को आरोपी अपनी बताकर बेच रहा था, उसका वास्तविक मालिक रोशन लाल नहीं था। उक्त जमीन अनीता देवी नामक अनुसूचित जाति की महिला के नाम दर्ज बताई गई।

अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी के झांसे में आने के बाद पीड़िता ने भारतीय स्टेट बैंक से 14 लाख रुपये का ऋण भी लिया था। आरोप है कि इसमें से बड़ी रकम आरोपी ने धोखाधड़ी कर हड़प ली।

हाईकोर्ट की शर्त से बचने की कोशिश को कोर्ट ने माना गंभीर

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने आरोपी के पूर्व आचरण का भी उल्लेख किया गया। अदालत को बताया गया कि आरोपी रोशन लाल को पूर्व में नैनीताल स्थित उच्च न्यायालय से अग्रिम जमानत इस शर्त पर मिली थी कि वह पीड़िता से ली गई धनराशि में से 3.50 लाख रुपये पांच सप्ताह के भीतर वापस करेगा। निर्धारित समय में रकम जमा नहीं करने की स्थिति में गिरफ्तारी पर मिली राहत प्रभावी नहीं मानी जानी थी।

अभियोजन के अनुसार आरोपी ने निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले ही उच्च न्यायालय से अपनी अग्रिम जमानत याचिका वापस ले ली और इसके बाद सत्र न्यायालय में नई जमानत अर्जी दाखिल कर दी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रशांत जोशी ने आरोपी के इस आचरण को गंभीरता से लेते हुए इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग और चालाकीपूर्ण रवैया माना। अदालत ने स्पष्ट किया कि कोई भी अभियुक्त अपनी सुविधानुसार न्यायालय के समक्ष दलीलें और कानूनी रास्ते नहीं बदल सकता।

अभियोजन की दलीलों और मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने प्रॉपर्टी डीलर रोशन लाल को जमानत देने से इनकार करते हुए उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी।

नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को भी जमानत नहीं

दूसरे मामले में पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश सुधीर तोमर ने नाबालिग पीड़िता को होटल ले जाकर जबरदस्ती दुष्कर्म करने के आरोपी नरेश पाण्डे निवासी भवाली की प्रथम जमानत याचिका निरस्त कर दी।

आरोपी के खिलाफ मल्लीताल थाने में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ पॉक्सो अधिनियम की धारा 3/4 एवं 16/17 के तहत मुकदमा दर्ज है। जमानत के पक्ष में आरोपी के अधिवक्ताओं ने उसे सामाजिक कार्यकर्ता बताते हुए रंजिशन झूठा फंसाए जाने की दलील दी।

वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) सुशील कुमार शर्मा ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत के समक्ष दलील दी कि पीड़िता और गवाहों के बयान के साथ मेडिकल साक्ष्य भी मामले की गंभीरता को दर्शाते हैं।

दोनों पक्षों को सुनने और पत्रावली का अवलोकन करने के बाद अदालत ने माना कि आरोपी पर नाबालिग किशोरी को होटल ले जाकर जबरदस्ती दुष्कर्म करने का गंभीर आरोप है और मामला अभी विवेचनाधीन है। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी का आपराधिक इतिहास सामने आया है और इस स्तर पर उसे जमानत देने से पीड़िता व गवाहों को प्रभावित किए जाने तथा आरोपी के फरार होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

अदालत ने पॉक्सो एक्ट को बच्चों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण प्रदान करने वाला विशेष कानून बताते हुए कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को जमानत पर रिहा करने का पर्याप्त आधार नहीं है। इसके बाद विशेष न्यायाधीश ने नरेश पाण्डे की प्रथम जमानत याचिका खारिज कर दी।

जमीन धोखाधड़ी के मामले में अदालत ने जहां न्यायिक प्रक्रिया के कथित दुरुपयोग पर सख्ती दिखाई, वहीं पॉक्सो मामले में नाबालिग की सुरक्षा और अपराध की गंभीरता को जमानत से इनकार का प्रमुख आधार माना। दोनों फैसलों से स्पष्ट है कि न्यायालय ने गंभीर आरोपों और आरोपियों के आचरण को देखते हुए राहत देने से इनकार किया है।

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