








चुनावी चौपालें सज रहीं… लेकिन अस्पताल की सुध कौन लेगा?
2027 के चुनावी रण में 19 दावेदार मैदान में, बावजूद हल्दूचौड़ सीएचसी डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा!
हल्दूचौड़। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ लालकुआं विधानसभा की सियासत गरमा चुकी है। भाजपा और कांग्रेस समेत विभिन्न दलों के कई चेहरे चुनावी मैदान में अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। पोस्टर लग रहे हैं, जनसंपर्क अभियान चल रहे हैं, विकास के दावे किए जा रहे हैं और जनता के बीच भरोसा जीतने की कवायद तेज हो गई है।
लेकिन इन सबके बीच एक सवाल हल्दूचौड़ की जनता बार-बार पूछ रही है—क्या चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे नेताओं की कोई नैतिक जिम्मेदारी क्षेत्र के सबसे बड़े सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रति भी नहीं बनती?
बुधवार को हल्दूचौड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दोपहर एक बजे तक 150 से अधिक नए ओपीडी पंजीकरण हुए। पुराने मरीजों को मिलाकर संख्या 200 के पार पहुंच गई। सीमित चिकित्सकीय व्यवस्था के बीच मरीज घंटों कतार में खड़े रहे। डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे इस अस्पताल की स्थिति वर्षों से चर्चा का विषय बनी हुई है।
विडंबना यह है कि चुनावी मंचों पर विकास की लंबी-लंबी बातें होती हैं, लेकिन क्षेत्र की सबसे बुनियादी जरूरत—स्वास्थ्य व्यवस्था—आज भी अपेक्षित सुधार का इंतजार कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विधानसभा की दावेदारी करने वाले सभी नेता मिलकर भी इस मुद्दे को शासन के सामने मजबूती से उठाएं, तो शायद अस्पताल की तस्वीर बदल सकती है।
इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रश्मि पंत का कहना है कि विभाग लगातार व्यवस्था सुधारने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत चिकित्सकों की तैनाती की गई है और नए चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए शासन से लगातार संवाद चल रहा है। विभाग को जल्द सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है।
इसके बावजूद क्षेत्रवासियों का मानना है कि अस्थायी व्यवस्था स्थायी समाधान नहीं हो सकती। उनका कहना है कि अब समय केवल चुनावी वादों का नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम दिखाने का है।
जनता का सवाल
2027 में वोट मांगने से पहले क्या सभी संभावित दावेदार हल्दूचौड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्थायी चिकित्सकों की नियुक्ति और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए एक साझा पहल करेंगे?
क्योंकि जनता को केवल भाषण नहीं, इलाज भी चाहिए; केवल वादे नहीं, डॉक्टर भी चाहिए। यही सवाल आज हल्दूचौड़ की चौपालों से लेकर अस्पताल की कतारों तक गूंज रहा है।
