“हाईकोर्ट के आदेश से मिली स्वास्थ्य सुविधा पर फिर संकट! हल्दूचौड़ सीएचसी से विशेषज्ञ डॉक्टर का तबादला बना बड़ा सवाल”
जनहित याचिका के बाद हुई थी विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती, अब बिना विकल्प स्थानांतरण से उठे कानूनी और प्रशासनिक सवाल!
दर्पण न्यूज 24×7 ब्यूरो | प्रमोद बमेटा | हल्दूचौड़
हल्दूचौड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। जिस अस्पताल को वर्षों तक संघर्ष, जनहित याचिका और माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद एक मात्र विशेषज्ञ चिकित्सक की सौगात मिली थी, वहीं अब उसी विशेषज्ञ चिकित्सक के स्थानांतरण ने नए विवाद को जन्म दे दिया है।
वर्ष 2014 में स्वीकृत 30 बेड का सीएचसी लंबे समय तक केवल भवन बनकर रह गया था। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों और आवश्यक स्टाफ की तैनाती न होने के कारण क्षेत्र की जनता को अपेक्षित स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही थीं। इस मुद्दे को लेकर लगातार आवाज उठी और अंततः मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचा। न्यायालय के निर्देशों के क्रम में वर्ष 2024 में शासन ने वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ सहित अन्य स्टाफ की तैनाती के आदेश जारी किए। इसके बाद अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की शुरुआत हुई।
लेकिन अब विशेषज्ञ चिकित्सक के स्थानांतरण ने पूरे घटनाक्रम पर सवालिया निशान लगा दिया है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जिस पद पर न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप तैनाती की गई थी, क्या उस पद को रिक्त छोड़कर स्थानांतरण किया जा सकता है? यदि स्थानांतरण आवश्यक था तो पहले समकक्ष विशेषज्ञ की तैनाती क्यों नहीं की गई?
स्वास्थ्य विभाग के इस निर्णय से न केवल अस्पताल की सेवाएं प्रभावित हो गई है, बल्कि उन हजारों ग्रामीणों की उम्मीदों को भी झटका लगा है जो हल्दूचौड़ सीएचसी पर निर्भर हैं। यदि विशेषज्ञ चिकित्सक का पद लंबे समय तक रिक्त रहता है तो न्यायालय के आदेशों की मंशा भी प्रभावित होती दिखाई दे सकती है।
अब निगाहें शासन पर टिकी हैं। देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती है। क्या हल्दूचौड़ को तुरंत नया विशेषज्ञ चिकित्सक मिलेगा, या फिर क्षेत्र की जनता को एक बार फिर उसी संघर्ष के दौर से गुजरना पड़ेगा, जिससे निकलने में लगभग एक दशक लग गया था?
बड़ा सवाल ये है कि क्या उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद हुई विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती को बिना वैकल्पिक व्यवस्था समाप्त करना न्यायालय की भावना के अनुरूप है? यदि नहीं, तो हल्दूचौड़ की स्वास्थ्य व्यवस्था का जिम्मेदार आखिर कौन होगा?
