लालकुआं विधान सभा में विकास कार्यों की अनदेखी पर छात्र नेताओं का अनोखा विरोध,तालाब बनी सड़क पर कपड़े धोकर निकाली विकास की मैल।
दर्पण न्यूज 24/7 लालकुआं। मुख्यमंत्री के “गड्ढा मुक्त उत्तराखंड” के विजन और स्थानीय स्तर पर विकास के दावों के बीच लालकुआं विधानसभा की कुछ सड़कें मानो अपनी अलग ही कहानी बयां कर रही हैं। कहीं शिलान्यास के शिलापट्ट चमक रहे हैं, तो कहीं सड़कें इतने गहरे गड्ढों से सजी हैं कि राहगीरों का चलना भी चुनौती बन गया है।
बरसात ने इन गड्ढों को मिनी तालाब में बदल दिया है। हालात ऐसे हैं कि स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को रोज़ जोखिम उठाकर गुजरना पड़ रहा है। इसी स्थिति के विरोध में छात्र नेता आशीष कबड़वाल, भानु कबड़वाल और प्रतीक जोशी ने ऐसा तरीका अपनाया जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
तीनों युवाओं ने सड़क के गड्ढों में भरे बरसाती पानी को ही “धोबीघाट” बना दिया और वहीं कपड़े धोकर प्रशासन व जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की। उनका कहना था कि जब सड़कें तालाब बन ही गई हैं, तो उनका उपयोग भी उसी हिसाब से कर लिया जाए।
यह विरोध जितना हास्यपूर्ण दिखा, उतना ही व्यवस्था पर तीखा कटाक्ष भी था। युवाओं का कहना है कि एक ओर सड़क निर्माण और विकास के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आम जनता टूटी सड़कों और जलभराव से जूझ रही है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदार विभागों की नींद खुलेगी?
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें भाषणों और शिलान्यास से ज्यादा सुरक्षित और गड्ढा मुक्त सड़कें चाहिए। बरसात के मौसम में इन गड्ढों के कारण दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहती है।
फिलहाल, विधान सभा लालकुआं की ज्यादातर सड़कें सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। लोगों की जुबान पर बस एक ही तंज है— “जहां सड़क खत्म होती है, वहीं से धोबीघाट शुरू हो जाता है!”
