राम मंदिर चढ़ावा गबन मामला: कानूनी कार्रवाई के साथ सामाजिक बहिष्कार की भी मांग।
नई दिल्ली/अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे में कथित गबन के मामले ने देशभर में धार्मिक आस्था और विश्वास को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। मामले में गिरफ्तार आठों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। वहीं, फैजाबाद बार एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर घोषणा की है कि उसका कोई भी सदस्य आरोपियों की ओर से अदालत में पैरवी नहीं करेगा। प्रस्ताव का उल्लंघन करने वाले वकील पर पांच लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया है।
भारतीय जनता पार्टी ने इस घटनाक्रम को हिंदू समाज की भावनाओं का प्रतिबिंब बताते हुए कहा कि रामलला के चढ़ावे में कथित गबन केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ विश्वासघात है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि आरोपी कानून की कार्रवाई के साथ-साथ सामाजिक बहिष्कार का भी सामना कर रहे हैं, जो समाज की भावनाओं को दर्शाता है।
भंडारी ने विपक्षी दलों पर तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए दावा किया कि समाजवादी पार्टी ने अयोध्या और वाराणसी विस्फोट मामलों के आरोपियों का समर्थन किया था। उन्होंने यह भी कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल जैसे वकीलों ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और दिल्ली दंगों जैसे चर्चित मामलों में आरोपियों की ओर से पैरवी की। उन्होंने कहा कि हिंदू सभ्यता सदियों से सत्य और न्याय के साथ खड़ी रही है तथा आस्था के साथ विश्वासघात करने वालों या उनका बचाव करने वालों को समाज का आशीर्वाद कभी नहीं मिलेगा।
गिरफ्तार आरोपियों में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, राम शंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामाशंकर उर्फ टिन्नू यादव शामिल हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार इन सभी का संबंध मंदिर में प्राप्त नकद और अन्य चढ़ावे की गणना के कार्य से था। कथित गबन के आरोप में सभी को गिरफ्तार किया गया और अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
उधर, फैजाबाद बार एसोसिएशन की आमसभा में मंदिर प्रबंधन से जुड़े चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव से तीन दिन के भीतर अयोध्या छोड़ने की मांग की गई। हालांकि इन तीनों का नाम प्राथमिकी में आरोपी के रूप में दर्ज नहीं है। वकीलों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो अयोध्या में व्यापक आंदोलन और शहर की घेराबंदी की जाएगी।
यह मामला अब केवल कानूनी जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं और मंदिरों में चढ़ाए जाने वाले दान की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। मामले की जांच जारी है और दोष तय होना अभी शेष है।
