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तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के बीच बजट पर टिकी देश की नजर
सीमा शुल्क सुधार, राजकोषीय घाटा और पूंजीगत व्यय पर होंगी बड़ी घोषणाएं!
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो नई दिल्ली।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार 9वां केंद्रीय बजट पेश कर नया रिकॉर्ड बनाने जा रही हैं। इस बजट से आम जनता से लेकर उद्योग जगत तक को बड़ी उम्मीदें हैं। खासतौर पर बहुप्रतीक्षित सीमा शुल्क सुधारों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
वित्त मंत्री ने 2019 में अपने पहले बजट में पारंपरिक बही-खाते के साथ दस्तावेज पेश कर परंपरा और आधुनिकता का संगम दिखाया था। पिछले चार वर्षों की तरह इस वर्ष भी बजट पेपरलेस (डिजिटल माध्यम) से पेश किया जाएगा।
सरकार के कुल खर्च और आय के अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में यह जीडीपी के 4.4 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है। बाजार की नजर अब इस बात पर है कि सरकार वित्त वर्ष 2026-27 में राजकोषीय घाटा 4 प्रतिशत तक लाने का रोडमैप पेश करती है या नहीं।
वित्त मंत्री पहले ही संकेत दे चुकी हैं कि केंद्र सरकार के कर्ज को जीडीपी के प्रतिशत के रूप में घटाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। वर्ष 2024 में कुल कर्ज-जीडीपी अनुपात 85 प्रतिशत था, जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 57 प्रतिशत रहा। सरकार से उम्मीद है कि वह 60 प्रतिशत के लक्ष्य तक पहुंचने की समय-सीमा बताएगी।
बुनियादी ढांचे पर रहेगा सरकार का फोकस
चालू वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार का नियोजित पूंजीगत व्यय 11.2 लाख करोड़ रुपये रखा गया है। निजी निवेश में सतर्कता को देखते हुए सरकार आगामी बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर सकती है। इससे पूंजीगत व्यय 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंचने की संभावना है।
उधारी और कर राजस्व पर बाजार की नजर
वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार की सकल उधारी 14.80 लाख करोड़ रुपये तय की गई है। यह देश की आर्थिक सेहत और राजस्व संग्रह की स्थिति का अहम संकेतक माना जाता है।
सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में सकल कर राजस्व का लक्ष्य 42.70 लाख करोड़ रुपये रखा है, जो पिछले वर्ष से करीब 11 प्रतिशत अधिक है।
प्रत्यक्ष कर (आयकर व कॉरपोरेट टैक्स): 25.20 लाख करोड़ रुपये
अप्रत्यक्ष कर (सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क, जीएसटी): 17.50 लाख करोड़ रुपये
वित्त वर्ष 2025-26 में जीएसटी संग्रह 11 प्रतिशत बढ़कर 11.78 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। सितंबर 2025 से दरों में कटौती के बाद राजस्व में तेजी आने की उम्मीद है, ऐसे में वित्त वर्ष 2026-27 के अनुमान अहम रहेंगे।
अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर नजर
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की मौजूदा कीमतों पर जीडीपी वृद्धि दर 10.1 प्रतिशत अनुमानित है, जबकि वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.4 प्रतिशत रहने की संभावना है।
आज से तंबाकू और पान मसाला महंगे
सिगरेट, गुटखा पर बढ़ा उत्पाद शुल्क और स्वास्थ्य उपकर लागू
दिल्ली। एक फरवरी से सिगरेट, तंबाकू उत्पादों और पान मसाला पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क एवं स्वास्थ्य उपकर लागू हो गया है। यह कर जीएसटी की अधिकतम 40 प्रतिशत दर के ऊपर लगाया जाएगा।
अब तक इन हानिकारक उत्पादों पर 28 प्रतिशत जीएसटी और क्षतिपूर्ति उपकर लगता था, जिसकी जगह अब नया उपकर और उत्पाद शुल्क लागू किया गया है।
इसके साथ ही एक फरवरी से तंबाकू उत्पादों पर एमआरपी आधारित मूल्यांकन प्रणाली लागू हो गई है। यानी अब जीएसटी की गणना पैकेट पर छपे खुदरा मूल्य के आधार पर होगी।
पान मसाला निर्माताओं को स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर कानून के तहत नया पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है।

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