








बरसात से पहले बिंदुखत्ता में बढ़ी धड़कनें, गोला किनारे बसे परिवारों ने विधायक से मांगा जवाब।
“हर साल उजड़ते हैं घर, आखिर कब मिलेगा स्थायी समाधान?”
दर्पण न्यूज 24/7 लालकुआं! बिंदुखत्ता क्षेत्र में बरसात नजदीक आते ही गोला नदी किनारे रहने वाले हजारों परिवारों की चिंता फिर बढ़ने लगी है। हर मानसून में भू-कटाव का दंश झेलने वाली “आधी आबादी” इस बार भी डर और अनिश्चितता के साये में जी रही है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि चुनावी मंचों से बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर आज तक स्थायी समाधान दिखाई नहीं दिया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले कई वर्षों से गोला नदी का कटाव लगातार बढ़ रहा है। किसानों की उपजाऊ जमीन नदी में समा चुकी है, कई मकानों पर खतरा मंडरा रहा है और सैकड़ों परिवार हर बरसात में रातें जागकर काटने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि हर साल प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से अस्थायी इंतजाम किए जाते हैं। कहीं रेत के कट्टे डाले जाते हैं तो कहीं छोटे-मोटे पैचवर्क कर खानापूर्ति कर दी जाती है, लेकिन तेज बहाव आते ही ये इंतजाम बह जाते हैं।
क्षेत्रवासियों ने विधायक मोहन सिंह बिष्ट से पांच साल का हिसाब मांगते हुए सवाल उठाया कि आखिर भू-कटाव रोकने के लिए अब तक ठोस योजना क्यों नहीं बनी। लोगों का कहना है कि चुनाव के दौरान सुरक्षा और स्थायी समाधान के दावे किए गए थे, लेकिन आज भी हालात जस के तस बने हुए हैं।
गोला किनारे रहने वाले लोगों की पीड़ा साफ झलक रही है। उनका कहना है कि “फोटो खिंचवाने और आश्वासन देने से कटाव नहीं रुकता। इसके लिए मजबूत इच्छाशक्ति और स्थायी इंजीनियरिंग समाधान चाहिए।”
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि गोला नदी किनारे तत्काल मजबूत तटबंधों और सुरक्षा दीवारों का निर्माण शुरू कराया जाए। साथ ही भू-कटाव रोकने के लिए विशेषज्ञों द्वारा तैयार मास्टर प्लान को सार्वजनिक किया जाए और प्रभावित परिवारों की सुरक्षा व पुनर्वास की ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
बरसात से पहले बिंदुखत्ता में बढ़ती बेचैनी साफ संकेत दे रही है कि इस बार लोग आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाला समाधान चाहते हैं।
