सराम मंदिर चढ़ावा घोटाले में बड़ा धमाका: एसआईटी ने खोली भ्रष्टाचार की परतें, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे से मचा भूचाल!
दर्पण न्यूज 24/7 अयोध्या/लखनऊ। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र बने राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन का मामला अब विस्फोटक मोड़ पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक जांच में ऐसी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, जिन्होंने पूरे मंदिर प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच के बाद चढ़ावे की नकदी और बहुमूल्य दान की गिनती से जुड़े आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने भी अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।
एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार मंदिर में चढ़ावे की सुरक्षा और गिनती के लिए बनाई गई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का खुलेआम उल्लंघन किया गया। गिनती कक्ष में सुरक्षा गार्डों की तैनाती नहीं थी, कर्मचारियों की तलाशी नहीं ली जाती थी और सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सीसीटीवी फुटेज, जिसे 180 दिन तक सुरक्षित रखा जाना चाहिए था, उसे केवल 45 दिन बाद ही हटा दिया जाता था।
जांच में यह भी सामने आया कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के पूर्व चालक रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के पास कई दानपात्रों (हुंडियों) की चाबियां थीं, जबकि नियमों के अनुसार ऐसा अधिकार किसी एक व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता। एसआईटी को आशंका है कि इन्हीं दानपात्रों से कथित रूप से चढ़ावे की नकदी निकाली गई।
सूत्रों के अनुसार वर्ष 2025 में ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारियों ने चढ़ावे की गिनती के लिए एसओपी तैयार की थी। इसमें कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाले कपड़े पहनना, सुरक्षा गार्डों की निगरानी, प्रवेश और निकास पर तलाशी तथा औचक निरीक्षण जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य थीं, लेकिन इनमें से लगभग किसी भी नियम का पालन नहीं किया गया।
एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया है कि चढ़ावे की गिनती के प्रभारी और आरोपी सुभाष श्रीवास्तव की नियुक्ति ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों में से एक की सिफारिश पर हुई थी। जांच के दौरान यह भी पता चला कि विवाद सामने आने और एसआईटी गठन से ठीक पहले गिनती कक्ष के पास स्थित शौचालय से ढाई लाख रुपये नकद बरामद किए गए थे।
अब तक गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव शामिल हैं। पुलिस के अनुसार छह आरोपियों के पास से लगभग 80 लाख रुपये नकद और विदेशी मुद्रा भी बरामद की गई है। सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
गौरतलब है कि यह विवाद तब शुरू हुआ जब समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर के चढ़ावे में गबन का आरोप लगाया था। उस समय ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने किसी भी अनियमितता से इनकार किया था, लेकिन एसआईटी की प्रारंभिक जांच ने कई गंभीर खामियों और कथित कुप्रबंधन की पुष्टि कर दी।
अब माना जा रहा है कि राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव किए जा सकते हैं। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले ने न केवल मंदिर प्रबंधन बल्कि पूरे देश में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
