गैरसैंण बजट सत्र में भ्रष्टाचार पर घमासान, विपक्ष का हल्लाबोल—सदन में हंगामा, 45 मिनट तक कार्यवाही स्थगित!
गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी, अवैध खनन और भर्ती घोटालों को लेकर सरकार पर बरसे विपक्षी विधायक!
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो!
गैरसैंण। भराड़ीसैंण में चल रहे उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र 2026 के पांचवें दिन शुक्रवार को सदन में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जबरदस्त घमासान देखने को मिला। बजट पर चर्चा के बीच विपक्ष ने प्रदेश के विभिन्न विभागों में बढ़ते भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर सरकार को घेरते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की। तीखी नोकझोंक के चलते सदन की कार्यवाही करीब 45 मिनट तक स्थगित करनी पड़ी।
सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष सरकार पर हमलावर नजर आया। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने नियम 310 के तहत प्रदेश में एलपीजी गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी और जमाखोरी का मुद्दा उठाया। विपक्ष का आरोप था कि प्रदेश के कई जिलों में गैस सिलेंडर के लिए लोगों को लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है, जबकि होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों को भी सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं।
विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष की मांग सुनने के बाद नियम 58 के तहत चर्चा की अनुमति दी, जिसके बाद सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार की जड़ें लगातार मजबूत होती जा रही हैं और भाजपा सरकार का जीरो टॉलरेंस का दावा पूरी तरह फेल साबित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के संरक्षण में ही भ्रष्टाचार को खुली छूट मिल रही है।
विपक्ष ने भर्ती घोटाले, योजनाओं के क्रियान्वयन में गड़बड़ी, विकास प्राधिकरणों में रिश्वतखोरी, अवैध खनन और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में धांधली जैसे कई मुद्दे उठाते हुए सरकार को कठघरे में खड़ा किया। विपक्ष का कहना था कि विकास प्राधिकरणों में बिना रिश्वत के नक्शे पास नहीं होते और खनन डंपरों से पुलिस द्वारा हफ्ता वसूली के आरोप भी सामने आ चुके हैं।
वहीं उप नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी ने सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता लाने के लिए इंटरव्यू खत्म किया था, लेकिन वर्तमान सरकार ने होम्योपैथिक डॉक्टर भर्ती में नियम बदलकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का काम किया है। उन्होंने सीएजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि स्मार्ट सिटी और देहरादून के परेड ग्राउंड रीडेवलपमेंट में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
वहीं संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि एलपीजी की आपूर्ति केंद्र सरकार का विषय है और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि घरेलू गैस सिलेंडरों की कोई कमी नहीं है। साथ ही सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। नैनीताल जिले में इस मामले में तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
इससे पहले सत्र शुरू होते ही विपक्ष ने अवैध खनन का मुद्दा भी उठाया, लेकिन सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
उधर प्रश्नकाल के दौरान पशुपालन, दुग्ध विकास और कौशल विकास विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल भी उठे। कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने बताया कि प्रदेश में दुग्ध उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में राज्य में 1957.25 हजार टन दूध का उत्पादन हो रहा है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 3.13 प्रतिशत अधिक है।
उन्होंने कहा कि राज्य में प्रतिदिन औसत दुग्ध उत्पादन करीब 53.62 लाख किलोग्राम है, जबकि अनुमानित खपत लगभग 50.34 लाख किलोग्राम प्रतिदिन है। प्रदेश में वर्तमान में 2830 दुग्ध सहकारी समितियां संचालित हो रही हैं और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीणों को रोजगार भी मिल रहा है।
हालांकि पूरे दिन सदन में भ्रष्टाचार और जनसरोकार के मुद्दों को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक टकराहट का माहौल बना रहा।
