लालकुआं में कांग्रेस की बढ़ती हलचल : क्या 2027 में वापसी की पटकथा लिख रही है पार्टी?
हरेंद्र बोरा और हेमवती नंदन दुर्गापाल सबसे मजबूत दावेदारों में, लेकिन बाकी चेहरों ने भी बढ़ाया सियासी तापमान!
प्रमोद बमेटा, ब्यूरो चीफ — दर्पण न्यूज 24/7
उत्तराखंड की राजनीति में लालकुआं विधानसभा हमेशा से बेहद दिलचस्प सीट मानी जाती रही है। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में अभी समय जरूर है, लेकिन कांग्रेस जिस तरह से यहां सक्रिय दिखाई दे रही है, उससे राजनीतिक माहौल अभी से गर्माने लगा है।
लंबे समय बाद कांग्रेस में ऐसा दृश्य नजर आ रहा है, जहां टिकट के लिए केवल एक-दो नहीं बल्कि कई चेहरे मैदान में सक्रिय हैं। यही वजह है कि पार्टी के भीतर सियासी तापमान चरम पर पहुंच चुका है।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो फिलहाल कांग्रेस में दो नाम सबसे ज्यादा मजबूत माने जा रहे हैं — वरिष्ठ नेता हरेंद्र बोरा और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश दुर्गापाल के पुत्र हेमवती नंदन दुर्गापाल।
दोनों नेताओं की सक्रियता, संगठन में पकड़ और समर्थकों का मजबूत नेटवर्क उन्हें अन्य दावेदारों से आगे खड़ा करता दिखाई दे रहा है।
हरेंद्र बोरा को संगठनात्मक राजनीति का अनुभवी और भरोसेमंद चेहरा माना जाता है। लंबे समय से पार्टी के लिए सक्रिय रहने और कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत पकड़ बनाए रखने का लाभ उन्हें मिल सकता है। कांग्रेस का एक बड़ा वर्ग मानता है कि चुनाव केवल लोकप्रियता से नहीं, बल्कि मजबूत संगठनात्मक ढांचे से जीते जाते हैं और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है।
वहीं हेमवती नंदन दुर्गापाल युवा ऊर्जा और राजनीतिक विरासत के कारण लगातार चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं। पूर्व मंत्री हरीश दुर्गापाल की राजनीतिक पकड़ और पारंपरिक जनाधार का लाभ उन्हें स्वाभाविक रूप से मिलता दिखाई देता है। युवा कार्यकर्ताओं के बीच उनकी बढ़ती सक्रियता भी उन्हें मजबूत दावेदारों की कतार में आगे ला रही है। कांग्रेस का एक धड़ा उन्हें भविष्य के चेहरे के तौर पर देख रहा है।
हालांकि मुकाबला केवल इन दो नामों तक सीमित नहीं है। प्रमोद कालोनी, उमेश कबड़वाल, अर्जुन बिष्ट, शंकर जोशी, राजेंद्र सिंह खनवाल और डॉ. बालम सिंह बिष्ट जैसे नेता भी लगातार क्षेत्र में सक्रियता बढ़ा रहे हैं। इन नेताओं की दावेदारी ने कांग्रेस के भीतर राजनीतिक हलचल और तेज कर दी है।
इन सभी नेताओं को भी संगठन और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच शांत लेकिन सक्रिय नेता माना जाता है, और सभी अनुभवी और पुराने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मजबूत तालमेल रखने वाले हैं।
इधर महिला नेतृत्व भी इस बार मजबूती से उभरता दिखाई दे रहा है संध्या डालाकोटी और बीना जोशी लगातार सामाजिक और महिला मुद्दों पर सक्रिय हैं।
अभी के हालात पर बात की जाय तो कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती टिकट चयन के बाद संगठन को एकजुट बनाए रखने की होगी। दावेदारों की संख्या जितनी अधिक है, टिकट वितरण के बाद नाराजगी की संभावना भी उतनी ही बड़ी मानी जा रही है। यही कारण है कि पार्टी हाईकमान इस बार काफी सतर्क नजर आ रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लालकुआं में इस बार कांग्रेस के पास माहौल बनाने का अवसर दिखाई दे रहा है। क्योंकि वर्तमान कार्यकाल से प्रतीत हो रहा है कि अब जनता केवल बड़े भाषणों और नारों से प्रभावित नहीं होने वाली है और क्षेत्र में लगातार मौजूद रहने वाले नेताओं को गंभीरता से देख रही है। सड़क, स्वास्थ्य, रोजगार, पेयजल और स्थानीय मूलभूत जन समस्याएं आने वाले चुनाव में अहम मुद्दे बन सकते हैं।
फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि लालकुआं में कांग्रेस इस बार पहले से कहीं ज्यादा सक्रिय और आत्मविश्वास से भरी दिखाई दे रही है। अब देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी हाईकमान अनुभव, संगठन और युवा ऊर्जा के बीच आखिर किस चेहरे पर अंतिम मुहर लगाता है।
