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हरिद्वार में ‘नकली नोट गैंग’ का पर्दाफाश: पंजाब के चार दबोचे, धर्मनगरी को बना रखा था जाली करेंसी का ठिकाना।

20 हजार में खरीदे थे एक लाख के फर्जी नोट, 84,500 रुपये की नकली करेंसी बरामद; बड़े नेटवर्क की तलाश में पुलिस।

प्रमोद बमेटा | दर्पण न्यूज 24×7

हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार को जाली नोटों की मंडी बनाने की साजिश रच रहे पंजाब के चार युवकों को नगर कोतवाली पुलिस ने धर दबोचा। आरोपियों के कब्जे से 500-500 रुपये के 169 नकली नोट, कुल 84,500 रुपये की फर्जी करेंसी बरामद हुई है। शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने महज 20 हजार रुपये में एक लाख रुपये के नकली नोट खरीदे थे और उन्हें भीड़भाड़ वाले बाजारों में असली बताकर खपाने की तैयारी थी।

पुलिस के मुताबिक रविवार देर रात बिल्केश्वर तिराहे पर चेकिंग के दौरान चार युवक पुलिस को देखकर अचानक पीछे मुड़ गए। उनकी हरकत संदिग्ध लगने पर पुलिस ने पीछा कर टिबड़ी तिराहे के पास चारों को दबोच लिया। तलाशी में भारी मात्रा में जाली नोट बरामद होने से पुलिस भी चौंक गई।

पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने गुरदासपुर (पंजाब) के एक व्यक्ति से 20 हजार रुपये देकर 500 रुपये के 200 नकली नोट खरीदे थे। इनमें से कुछ नोट वे हरिद्वार के बाजारों में खरीदारी के दौरान पहले ही चला चुके हैं, जबकि बाकी नोट पुलिस ने बरामद कर लिए।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सरजीत सिंह, टिंकू, सुमित कुमार और संजीव कुमार, निवासी गुरदासपुर (पंजाब) के रूप में हुई है। चारों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में पेश किया जा रहा है।

नगर कोतवाली प्रभारी कुंदन राणा ने बताया कि प्रारंभिक जांच से स्पष्ट हुआ है कि आरोपी भीड़भाड़ वाले बाजारों, धार्मिक स्थलों और अधिक नकदी के लेन-देन वाले इलाकों को निशाना बनाकर नकली नोट खपाने पहुंचे थे। पुलिस अब उन दुकानों की पहचान कर रही है जहां ये फर्जी नोट चलाए गए।

बड़े गिरोह की आशंका, सप्लायर की तलाश तेज

पुलिस का मानना है कि यह मामला केवल चार आरोपियों तक सीमित नहीं है। इसके पीछे जाली नोटों की सप्लाई करने वाला बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। मुख्य सप्लायर और पूरे गिरोह तक पहुंचने के लिए पुलिस ने जांच तेज कर दी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

धार्मिक नगरी हरिद्वार में जाली नोटों की खेप का पहुंचना केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती है। यदि पुलिस समय रहते सक्रिय नहीं होती, तो बड़ी संख्या में नकली नोट बाजार में खपाए जा सकते थे। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस गिरोह की जड़ें उत्तराखंड के अन्य शहरों तक भी फैली हैं? पुलिस की आगे की जांच इस रहस्य से पर्दा उठाएगी।

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