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फर्जी ‘पीए’ कांड से कांग्रेस में हलचल, गोदियाल के आंसुओं ने खोली अंदरूनी सियासत की परतें!
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो | प्रमोद बमेटा
देहरादून। कांग्रेस नेता राहुल गांधी का निजी सहायक (पीए) बनकर नेताओं से ठगी करने का मामला भले ही एक आपराधिक घटना हो, लेकिन इसने उत्तराखण्ड कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और गुटबाजी को भी उजागर कर दिया है। इस पूरे प्रकरण के बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल का भावुक होना कई संकेत दे गया।
पत्रकार वार्ता के दौरान गोदियाल ने खुलकर स्वीकार किया कि उनके खिलाफ पार्टी के भीतर साजिशें चल रही हैं। वे इतने व्यथित दिखे कि अपने आंसू नहीं रोक पाए। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी में उनसे अधिक सक्षम कोई और है, तो संगठन की कमान उसे सौंपने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में गहराई से देखा जा रहा है।
देहरादून पुलिस ने इस मामले में अमृतसर निवासी गौरव कुमार को गिरफ्तार किया है। आरोपी लंबे समय से राहुल गांधी का पीए बनकर देशभर में कांग्रेस नेताओं को चुनावी टिकट दिलाने और संगठन में पद दिलाने के नाम पर ठगी कर रहा था।
पुलिस के अनुसार आरोपी ने राजस्थान, पंजाब और बिहार के कई नेताओं को निशाना बनाया और करोड़ों रुपये ऐंठे। उत्तराखण्ड में भी वह सक्रिय हो चुका था। हाल ही में वह देहरादून के पैसिफिक मॉल, जाखन में एक नेता से 12 लाख रुपये लेने पहुंचा था, जहां पुलिस ने जाल बिछाकर उसे गिरफ्तार कर लिया।
जांच में सामने आया है कि आरोपी ने कनिष्क सिंह के नाम से फर्जी पहचान बनाकर ट्रूकॉलर पर आईडी तैयार की थी। इसी के जरिए वह नेताओं से संपर्क करता और खुद को हाई-प्रोफाइल पहुंच वाला व्यक्ति साबित करता था।
उसके पास कई बड़े नेताओं, जिनमें हरीश रावत, गणेश गोदियाल और हरक सिंह रावत शामिल हैं, की कथित ऑडियो कॉल रिकॉर्डिंग भी मिली हैं। इन रिकॉर्डिंग्स का इस्तेमाल वह अपनी विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए करता था।
इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या राजनीतिक दलों में टिकट के बदले पैसे का कोई अनौपचारिक तंत्र काम कर रहा है? यदि ऐसा नहीं है, तो फिर अलग-अलग राज्यों के नेता एक अंजान व्यक्ति के झांसे में कैसे आ गए?
राजस्थान, पंजाब, बिहार और अब उत्तराखण्ड तक फैले इस ठगी नेटवर्क से यह भी संकेत मिलता है कि आरोपी ने सुनियोजित तरीके से राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का फायदा उठाया।
पुलिस के मुताबिक आरोपी के मोबाइल फोन में कई अहम कॉल रिकॉर्डिंग्स और संपर्क मौजूद हैं, जिनकी जांच जारी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
फिलहाल यह मामला सिर्फ एक ठगी नहीं, बल्कि राजनीतिक तंत्र की कार्यशैली, नेताओं की सतर्कता और पार्टी के भीतर के समीकरणों पर भी सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना होगा कि जांच की दिशा किस ओर जाती है और इससे कांग्रेस संगठन पर क्या असर पड़ता है।

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