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नैनो तकनीक और जैविक खेती के गुर सीख रहे किसान, इफको प्लांट में देखा कृषि का भविष्य।
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो, प्रयागराज।
मोतीलाल नेहरू किसान प्रशिक्षण संस्थान, फूलपुर में आयोजित चार दिवसीय किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम के तीसरे दिन किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, नैनो उर्वरकों तथा जैविक खेती के नवाचारों से रूबरू कराया गया। प्रशिक्षण के अंतर्गत किसानों के शैक्षिक भ्रमण का आयोजन किया गया, जिसमें उन्हें कृषि क्षेत्र में हो रहे तकनीकी बदलावों और मूल्य संवर्धन की संभावनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
कोरडेट कॉपरेटिव रूरल डेवलपमेंट ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित भ्रमण के दौरान किसानों ने इफको के नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी उत्पादन संयंत्र का अवलोकन किया। विशेषज्ञों ने बताया कि नैनो उर्वरक पारंपरिक रासायनिक उर्वरकों की तुलना में अधिक प्रभावी होने के साथ लागत कम करने और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। किसानों को नैनो तकनीक आधारित खेती के लाभों और इसके प्रयोग की विधि की जानकारी दी गई।
भ्रमण के दौरान किसानों ने इफको की बायो-फर्टिलाइजर यूनिट का भी निरीक्षण किया, जहां जैविक उर्वरकों के निर्माण, लाभकारी सूक्ष्म जीवों के उपयोग तथा मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने की तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया गया। विशेषज्ञों ने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर जैविक एवं संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाने पर बल दिया।
किसानों को खाद्य प्रसंस्करण एवं शहद प्रसंस्करण इकाइयों का भ्रमण भी कराया गया। यहां उन्हें कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर अतिरिक्त आय अर्जित करने के विभिन्न मॉडल समझाए गए। प्रशिक्षणार्थियों ने प्रसंस्करण तकनीकों, पैकेजिंग और विपणन से जुड़ी जानकारियां भी प्राप्त कीं।
इसके अतिरिक्त गौशाला का भ्रमण कर किसानों को गोबर एवं गोमूत्र आधारित जैविक उत्पादों, वर्मीकम्पोस्ट निर्माण तथा प्राकृतिक खेती की उपयोगी विधियों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग कर खेती की लागत घटाई जा सकती है और मिट्टी की गुणवत्ता को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के दस राज्यों के विभिन्न जिलों से आए दर्जनों किसानों ने सहभागिता की। उत्तराखंड की ओर से प्रगतिशील किसान एवं पत्रकार ईश्वरी दत्त भट्ट, धर्मानंद खोलिया, प्रमोद बमेटा तथा दया किशन खोलिया ने भी सक्रिय रूप से भाग लेते हुए आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने नैनो उर्वरकों, जैविक खेती, प्रसंस्करण उद्योग और प्राकृतिक खेती से जुड़े व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किए, जिन्हें वे अपने क्षेत्रों में अपनाकर कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बना सकेंगे।

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