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बिना अस्थायी बिजली कनेक्शन कैसे खड़ा हो गया करोड़ों का हॉस्टल?

दर्पण न्यूज 24/7 | हल्दूचौड़

पीएम श्री अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज, हल्दूचौड़ परिसर में निर्माणाधीन करोड़ों रुपये की आवासीय विद्यालय छात्रावास परियोजना विवादों के केंद्र में आ गई है। आरोप है कि विशाल भवन का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद अब तक यूपीसीएल से अस्थायी विद्युत संयोजन नहीं लिया गया। ऐसे में निर्माण कार्य के दौरान उपयोग की गई बिजली और ऊर्जा के स्रोत को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब केंद्र और राज्य सरकारें ऊर्जा संरक्षण और बिजली बचत को राष्ट्रीय अभियान के रूप में चला रही हैं, तब सरकारी निर्माण परियोजनाओं में ऊर्जा उपयोग के नियमों का पालन हुआ या नहीं, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। लोगों का सवाल है कि यदि निर्माण कार्य जनरेटर से हुआ तो लाखों रुपये का डीजल आखिर किस मद से खर्च किया गया? और यदि जनरेटर नहीं चला, तो फिर निर्माण में प्रयुक्त बिजली का स्रोत क्या था?

सूत्रों के अनुसार निर्माण कार्य में निजी जनरेटरों के उपयोग की बात कही जा रही है, लेकिन क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि कहीं मामला अवैध विद्युत उपयोग अथवा बिजली चोरी से तो जुड़ा नहीं है। हालांकि इन दावों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें जांच के बाद ही सत्यापित किया जा सकता है।

मामले को लेकर संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्था का ध्यान कई बार आकर्षित किए जाने के बावजूद अब तक कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। इससे लोगों की शंकाएं और गहरी होती जा रही हैं।

इस बीच स्थानीय आरटीआई कार्यकर्ताओं ने भी मोर्चा संभाल लिया है। उनका कहना है कि यदि विभाग स्वयं पूरे प्रकरण को स्पष्ट नहीं करता तो सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत परियोजना में विद्युत उपयोग, अस्थायी विद्युत संयोजन, भुगतान, ऊर्जा खपत और तकनीकी स्वीकृतियों से जुड़े सभी अभिलेख मांगे जाएंगे। उनका कहना है कि यदि सब कुछ नियमानुसार हुआ है तो दस्तावेज स्वयं स्थिति स्पष्ट कर देंगे, लेकिन यदि कहीं अनियमितता मिली तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार पक्षों की जवाबदेही तय कराई जाएगी।

उधर यूपीसीएल के अवर अभियंता ने बताया कि निर्माण स्थल पर अस्थायी विद्युत संयोजन लेने की प्रक्रिया अब गतिमान है। लेकिन यहीं सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है कि जब भवन का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है तो अस्थायी कनेक्शन अब क्यों लिया जा रहा है? क्या मीडिया में मामला सामने आने के बाद विभाग हरकत में आया?

अब पूरा मामला प्रशासन, यूपीसीएल और कार्यदायी संस्था की निष्पक्ष जांच पर टिका है। यदि जांच होती है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण कार्य में ऊर्जा का उपयोग पूरी तरह नियमों के अनुरूप हुआ या नहीं। वहीं यदि जांच नहीं होती, तो यह सवाल लंबे समय तक सरकारी परियोजनाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठते रहेंगे।

अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि विभाग स्वयं पूरे मामले का खुलासा करता है या फिर आरटीआई के जरिए सामने आने वाले दस्तावेज इस निर्माण परियोजना की वास्तविक तस्वीर उजागर करेंगे।

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