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करोड़ों की लागत का हॉस्टल खड़ा हो गया, लेकिन बिजली कहां से आई? पेयजल निर्माण निगम द्वारा बनाई जा रही उक्त परियोजना पर गहराया रहस्य!
टेम्परेरी कनेक्शन नहीं, जनरेटर का दावा… फिर भी उठ रहे कई सवाल!
दर्पण न्यूज 24/7 हल्दूचौड़। पीएम श्री अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज हल्दूचौड़ परिसर में करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे आवासीय विद्यालय के हॉस्टल निर्माण को लेकर एक नया सवाल खड़ा हो गया है—आखिर इतने बड़े निर्माण कार्य के दौरान बिजली की आपूर्ति किस माध्यम से हुई?
पेयजल निर्माण निगम की देखरेख में तैयार हो रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है, लेकिन निर्माण अवधि में उपयोग हुई बिजली को लेकर अब चर्चाओं का बाजार गर्म है। कारण यह है कि संबंधित कार्य के लिए नियमानुसार अस्थायी  विद्युत कनेक्शन लिए जाने का कोई रिकॉर्ड सामने नहीं आया है।
सूत्रों के अनुसार निर्माण के दौरान कंक्रीट मिक्सर, वेल्डिंग मशीन, कटिंग मशीन सहित कई विद्युत उपकरणों का लगातार उपयोग किया गया। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि इन मशीनों को ऊर्जा कहां से मिली और क्या इसके लिए विभागीय अनुमति ली गई थी?
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब विद्युत विभाग के अवर अभियंता ने स्वीकार किया कि निर्माण कार्य के लिए टेम्परेरी विद्युत कनेक्शन नहीं लिया गया था। उन्होंने बताया कि संबंधित ठेकेदार को आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर अस्थायी कनेक्शन लेने के लिए कहा गया है।
दूसरी ओर, संबंधित ठेकेदार किसी भी अनियमितता से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि निर्माण कार्य के लिए उनके पास निजी जनरेटर उपलब्ध थे और पूरे निर्माण में उन्हीं का उपयोग किया गया। कार्यदाई संस्था पेयजल निर्माण निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर दिवाकर बड़ोनी ने भी ठेकेदार के इस दावे का समर्थन करते हुए कहा कि निर्माण कार्य निजी जनरेटरों की सहायता से किया गया है।
लेकिन यहीं से कहानी में सस्पेंस शुरू होता है।
यदि पूरा निर्माण जनरेटरों से हुआ, तो क्या इसके समर्थन में डीजल खपत, जनरेटर संचालन और रखरखाव से जुड़े अभिलेख मौजूद हैं? और यदि वास्तव में टेम्परेरी कनेक्शन नहीं लिया गया था, तो निर्माण अवधि के दौरान विभागीय निगरानी और निरीक्षण की स्थिति क्या रही?
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब आम उपभोक्ताओं पर बिजली नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाता है, तो करोड़ों रुपये की सरकारी परियोजनाओं में भी समान मानकों का पालन होना चाहिए। उनका मानना है कि पूरे मामले की पारदर्शी जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए।
यह विवाद अब केवल बिजली उपयोग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकारी निर्माण कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है। क्षेत्रवासियों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाने की मांग की है।
फिलहाल, करोड़ों का हॉस्टल तो तैयार खड़ा है, लेकिन “बिजली कहां से आई?” यह सवाल अभी भी जवाब तलाश रहा है।

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