करोड़ों की इमारत खड़ी हो गई, लेकिन बिजली कहां से आई? पीएम श्री अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज हल्दूचौड़ में बन रहे सरकारी हॉस्टल निर्माण पर गहराया रहस्य।
सूत्रों के दावों और विभागीय स्वीकारोक्ति ने खड़े किए कई गंभीर सवाल, जवाबदेही पर उठे प्रश्न!
हल्दूचौड़। सरकारी निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और नियमों के पालन के दावों के बीच पीएम श्री अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज हल्दूचौड़ परिसर में निर्माणाधीन आवासीय विद्यालय के हॉस्टल को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रही इस विशाल इमारत का निर्माण लंबे समय से जारी है, लेकिन निर्माण कार्य के लिए आवश्यक अस्थायी (टेम्परेरी) विद्युत कनेक्शन लिए जाने के प्रमाण सामने नहीं आए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब भवन निर्माण में कंक्रीट मिक्सर, वेल्डिंग मशीन, कटिंग मशीन और अन्य विद्युत उपकरणों का उपयोग लगातार किया जाता रहा, तो इन मशीनों को संचालित करने के लिए बिजली आखिर कहां से उपलब्ध कराई गई? यदि निर्माण स्थल पर वैध अस्थायी कनेक्शन नहीं था तो फिर निर्माण कार्य किस व्यवस्था के तहत चल रहा था?
मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब इस संबंध में विद्युत विभाग के अवर अभियंता से जानकारी ली गई। अवर अभियंता ने स्वीकार किया कि निर्माण कार्य बिना टेम्परेरी कनेक्शन के संचालित हो रहा है और संबंधित ठेकेदार को कनेक्शन लेने के लिए कहा गया है। विभागीय अधिकारी की यह स्वीकारोक्ति अपने आप में कई नए सवाल पैदा कर रही है।
यदि निर्माण कार्य बिना अस्थायी कनेक्शन के चल रहा था, तो क्या विभाग को इसकी जानकारी पहले से नहीं थी? यदि जानकारी थी, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई? यदि जानकारी नहीं थी, तो फिर विभागीय निरीक्षण और निगरानी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति क्या है?
निर्माण स्थल पर बेतरतीब तरीके से पड़े बिजली के तार भी कई आशंकाओं को जन्म दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े सरकारी निर्माण कार्य में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था कोई छोटी बात नहीं होती। ऐसे में यदि नियमों का पालन नहीं किया गया तो इसकी जिम्मेदारी केवल ठेकेदार तक सीमित नहीं रह सकती।
क्षेत्र में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि यदि निर्माण अवधि के दौरान वैध कनेक्शन नहीं लिया गया था तो उस दौरान हुई बिजली खपत का आकलन किया जाना चाहिए। इससे स्पष्ट हो सकेगा कि विभाग को किसी प्रकार की राजस्व हानि हुई है या नहीं। यदि हुई है तो उसकी भरपाई कौन करेगा और इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा?
यह भी सवाल उठ रहा है कि आम उपभोक्ताओं के मामलों में बिजली विभाग बिजली चोरी या अनियमित उपयोग पर तत्काल कार्रवाई करता है, लेकिन सरकारी परिसर में चल रहे इतने बड़े निर्माण कार्य के मामले में स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम क्यों नहीं दिखाई दिया।
मामला अब केवल बिजली उपयोग तक सीमित नहीं रह गया है। यह सरकारी परियोजनाओं में नियमों के पालन, विभागीय निगरानी, जवाबदेही और पारदर्शिता से जुड़ा विषय बन गया है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि निर्माण कार्य के दौरान बिजली की व्यवस्था किस आधार पर की गई, क्या सभी नियमों का पालन हुआ और यदि कहीं कोई चूक हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, करोड़ों रुपये की इमारत लगभग तैयार होने की ओर बढ़ रही है, लेकिन यह सवाल अब भी हवा में तैर रहा है कि आखिर इतने बड़े निर्माण कार्य को ऊर्जा देने वाली बिजली आई कहां से? और यदि सब कुछ नियमों के तहत हुआ है तो संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जा रही?
यह समाचार स्थानीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी, मौके पर मौजूद परिस्थितियों तथा संबंधित विभागीय अधिकारी से हुई बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। मामले की वास्तविक स्थिति सक्षम विभागीय जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
