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सोयाबीन फैक्ट्री ध्वस्तीकरण प्रकरण में परिसर में की गई गहरी खुदाई से निकले उपखनिज प्रकरण की गतिमान जांच के बीच अब मलबे से पाटे जा रहे गड्ढे।
शिकायत के बाद एसडीएम भी तलब करवा चुकी है पत्रावली, एमडी स्तर से गतिमान है विभागीय जांच,
सामग्री निकासी के प्रबंधक के

आदेश के अनुपालन पर भी उठे सवाल।

हल्दूचौड़। यूसीएफ के सोयाबीन एवं वनस्पति कॉम्प्लेक्स के ध्वस्तीकरण का मामला अब पुराने भवनों को गिराने तक सीमित नहीं रहा। ध्वस्तीकरण के दौरान परिसर में गहरी खुदाई कर उपखनिज निकाले जाने की शिकायत, खुदाई से बने गड्ढों को अब मलबे से पाटे जाने और ध्वस्तीकरण से निकली सामग्री की निकासी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायत के बाद एसडीएम लालकुआं ने मामले से संबंधित पत्रावलियां तलब की हैं। वहीं, महाप्रबंधक की संस्तुति पर एमडी स्तर से विभागीय जांच की संस्तुति भी की जा चुकी है जो समयावधि पूरी होने के बाद भी गतिमान बताई जा रही है। जांच के बीच मौके पर जारी गतिविधियों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
मामले की शुरुआत ध्वस्तीकरण कार्य के दौरान परिसर में अपेक्षाकृत गहरी खुदाई और वहां से निकली सामग्री को लेकर हुई शिकायत से हुई। शिकायत के बाद एसडीएम लालकुआं रेखा कोहली ने यूसीएफ परिसर का निरीक्षण किया और ध्वस्तीकरण से संबंधित पत्रावलियां व अभिलेख तलब किए। इसके बाद यूसीएफ प्रबंधन स्तर पर भी मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय जांच की संस्तुति की गई।
वर्तमान में जांच की प्रक्रिया चल ही रही थी कि परिसर में गहरी खुदाई से बने गड्ढों को ध्वस्तीकरण से निकल रहे मलबे से पाटे जाने की तस्वीरें सामने आईं। जेसीबी से गड्ढों को भरने की कार्रवाई ने सवाल खड़ा कर दिया कि ध्वस्तीकरण के लिए जमीन में कितनी गहराई तक खुदाई की गई और वहां से निकली मिट्टी, पत्थर अथवा अन्य उपखनिज सामग्री का क्या हुआ।
उपखनिज निकाले या बेचे जाने की शिकायत की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी, लेकिन गहरी खुदाई और उसके बाद गड्ढों को मलबे से भरने की कार्रवाई जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है। गड्ढे पूरी तरह भर जाने के बाद मौके पर हुई खुदाई की वास्तविक गहराई और उससे निकली सामग्री का प्रत्यक्ष सत्यापन मुश्किल हो सकता है। ऐसे में खुदाई से पहले और बाद के फोटो-वीडियो, सीसीटीवी फुटेज, मशीनों की आवाजाही, वाहनों के रिकॉर्ड और संबंधित अभिलेख जांच में अहम साबित हो सकते हैं।
ध्वस्तीकरण का करीब 75 फीसदी काम पूरा होने के बाद विगत 18 सितंबर को प्रबंधक की ओर से मलबा, लोहा, ईंट, लकड़ी और अन्य उपयोगी अथवा स्क्रैप सामग्री को परिसर से बाहर ले जाने की प्रक्रिया को पारदर्शी और अभिलेखीय बनाने के लिए आदेश जारी किया गया। आदेश में दो जिम्मेदार कर्मियों की संस्तुति के बिना सामग्री निकासी नहीं किए जाने और इसकी जवाबदेही तय किए जाने की व्यवस्था की गई थी।
इसके बावजूद आदेश के अनुपालन को लेकर सवाल उठे हैं। मौके पर बिना संस्तुति के सामग्री की आवाजाही को लेकर जब प्रबंधक से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि यदि आदेश का अनुपालन नहीं हुआ है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इससे यह सवाल भी खड़ा हुआ कि प्रबंधन द्वारा जारी आदेश के अनुपालन की निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी।
इधर 18 सितंबर के आदेश को लेकर खबर प्रकाशित होने के अगले दिन मीडिया कर्मियों के परिसर में पहुंचने के बाद प्रबंधन की सक्रियता भी चर्चा में रही। महाप्रबंधक त्रिभुवन रावत के परिसर पहुंचने पर सुरक्षा कर्मियों से मीडिया कर्मियों द्वारा आदेश की फोटो लिए जाने को लेकर पूछताछ किए जाने की बात सामने आई। पत्रकारों से बिना अनुमति परिसर में प्रवेश नहीं करने को भी कहा गया।
महाप्रबंधक त्रिभुवन रावत का कहना है कि विभागीय जांच गतिमान है और नियमों का उल्लंघन सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना है कि ध्वस्तीकरण का काम जल्द पूरा किया जाना है, इसलिए प्रबंधक के आदेश में आवश्यक संशोधन भी किया जाएगा।
महाप्रबंधक के इस बयान के बाद सवाल यह भी है कि यदि 18 सितंबर के आदेश में संशोधन की जरूरत थी तो इसकी आवश्यकता आदेश जारी होने के बाद सामने क्यों आई और तब तक उसके अनुपालन की निगरानी किस तरह हुई।
अब जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि ध्वस्तीकरण की स्वीकृत सीमा क्या थी और जमीन में कितनी गहराई तक खुदाई की गई। खुदाई से कितनी सामग्री निकली और उसकी मौके पर क्या स्थिति रही। ध्वस्तीकरण से निकले मलबे की मात्रा कितनी थी और परिसर से कितनी सामग्री बाहर गई। सामग्री किसकी अनुमति या संस्तुति से निकली, उसका वजन, मात्रा, वाहन और समय का रिकॉर्ड कहां है। 18 सितंबर के आदेश का कितना अनुपालन हुआ और उसमें संशोधन की आवश्यकता क्यों पड़ी।
फिलहाल उपखनिज निकाले या बेचे जाने के आरोप की पुष्टि जांच पूरी होने से पहले नहीं की जा सकती। लेकिन शिकायत के बाद एसडीएम का निरीक्षण, पत्रावलियों का तलब किया जाना, एमडी स्तर से विभागीय जांच की संस्तुति, गहरी खुदाई के बाद गड्ढों को मलबे से पाटे जाने की कार्रवाई और सामग्री निकासी को लेकर प्रबंधन के आदेश के अनुपालन पर उठे सवालों ने मामले को गंभीर बना दिया है।
अब जांच का अहम बिंदु यही है कि ध्वस्तीकरण के दौरान जमीन के भीतर से क्या निकला, परिसर से क्या बाहर गया और उसका पूरा रिकॉर्ड कहां है। जांच पूरी होने तक मौके की स्थिति और संबंधित अभिलेख सुरक्षित रखना और खोदे गये गड्ढों की यथा स्थिति बनाए रखना भी जांच की पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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