








महानगर हल्द्वानी की सफाई व्यवस्था को नई दिशा देने में जुटे मेयर गजराज बिष्ट, कूड़ा प्रबंधन पर जोर!
दर्पण न्यूज 24/7 संवाददाता हल्द्वानी। शहर को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने की दिशा में नगर निगम हल्द्वानी-काठगोदाम ने ठोस कदम तेज कर दिए हैं। महापौर गजराज सिंह बिष्ट के नेतृत्व में निगम अब केवल सफाई कराने तक सीमित न रहकर कूड़े के वैज्ञानिक प्रबंधन और स्रोत पर ही कूड़ा अलग करने पर विशेष जोर दे रहा है।
नगर निगम की ओर से जारी जनजागरूकता अपील में शहरवासियों से घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों में गीले, सूखे, सैनिटरी तथा विशेष श्रेणी के कचरे को अलग-अलग रखने की अपील की गई है। यह व्यवस्था ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के अनुरूप है। केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित नए नियमों में भी स्रोत पर चार श्रेणियों में कचरा पृथक्करण को अनिवार्य किया गया है।
महापौर गजराज बिष्ट की पहल की खास बात यह है कि स्वच्छता व्यवस्था में आम जनता की भागीदारी को केंद्र में रखा गया है। निगम की अपील में लोगों से सिंगल यूज प्लास्टिक से बचने, घर में डस्टबिन रखने, गीले कचरे से कंपोस्ट खाद बनाने और कूड़ा निर्धारित वाहन में ही डालने का आग्रह किया गया है।
चार रंगों के डस्टबिन के जरिए व्यवस्था को आसान बनाया गया है। हरा डिब्बा गीले कचरे, नीला सूखे कचरे, लाल सैनिटरी कचरे और काला विशेष/खतरनाक कचरे के लिए निर्धारित किया गया है। इससे कचरे के निस्तारण के साथ-साथ रिसाइक्लिंग और संसाधनों के पुन: उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।
नगर निगम की ओर से होटल, बैंक्वेट हॉल, स्कूल और अन्य बल्क वेस्ट जनरेटर प्रतिष्ठानों को भी कचरे का पृथक्करण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। खुले में कूड़ा फेंकने या जलाने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
नगर निगम की आधिकारिक जानकारी के अनुसार शहर के विभिन्न वार्डों में सफाई व्यवस्था की निगरानी के लिए पर्यावरण पर्यवेक्षकों और सफाई निरीक्षकों की व्यवस्था है। वहीं निगम की वेबसाइट पर महापौर गजराज सिंह बिष्ट के नेतृत्व में स्वच्छ भारत मिशन समेत विभिन्न योजनाओं के माध्यम से शहर के विकास पर जोर दिए जाने की जानकारी दी गई है।
कुल मिलाकर, कूड़ा प्रबंधन को लेकर नगर निगम की यह पहल हल्द्वानी को स्वच्छ बनाने के साथ-साथ शहरवासियों में जिम्मेदारी की भावना विकसित करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। यदि जनता और निगम मिलकर इस व्यवस्था को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करते हैं तो ‘मेरा शहर, मेरी पहचान’ का संदेश वास्तव में धरातल पर दिखाई दे सकता है।
