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अब हो रही है मानव-वन्यजीव संघर्ष पर लगाम लगाने को लेकर ये तैयारी, गांव-गांव चिह्नित होंगे खतरे के हॉटस्पॉट!

जिलों में बनेगी मैपिंग, डीएम की अध्यक्षता में गठित होंगी समितियां, हिंसक वन्यजीवों के खतरे से निपटने को लेकर ये विभाग मिलकर बनाएंगे रणनीति!

देहरादून। दर्पण न्यूज 24/7

उत्तराखंड में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष के बीच शासन ने अब गांव स्तर पर खतरे की पहचान कर बचाव की रणनीति तैयार करने की पहल की है। प्रदेश के प्रत्येक जिले में उन गांवों और क्षेत्रों को चिह्नित किया जाएगा, जहां वन्यजीवों के हमले की आशंका अधिक है। इन संवेदनशील इलाकों की मैपिंग के आधार पर लोगों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। शासनादेश जारी होने के बाद जिला स्तरीय मानव-वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण एवं प्रबंधन समितियों के गठन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।

नई व्यवस्था के तहत जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित होने वाली समितियां वन विभाग के साथ पुलिस, राजस्व, कृषि, शिक्षा, सूचना, ग्राम्य विकास, ऊर्जा और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय स्थापित करेंगी। संबंधित क्षेत्रों के तीन ग्राम प्रधानों को भी समिति में शामिल किया जाएगा, ताकि स्थानीय परिस्थितियों और ग्रामीणों की समस्याओं को सीधे योजना का हिस्सा बनाया जा सके।

मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक नीना ग्रेवाल ने सभी नोडल प्रभागीय वनाधिकारियों को पत्र भेजकर जिलाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करने और समितियों का गठन शीघ्र पूरा कराने के निर्देश दिए हैं।

प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भालू, गुलदार समेत अन्य वन्यजीवों की सक्रियता ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए चुनौती बनी हुई है। ऐसे में केवल वन विभाग के स्तर पर कार्रवाई करने के बजाय जिला प्रशासन और दूसरे संबंधित विभागों को भी इस अभियान से जोड़ने की पहल की गई है।

हॉटस्पॉट की पहचान और मैपिंग से उन गांवों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा, जहां वन्यजीवों की आवाजाही या हमलों का खतरा अधिक है। इसके आधार पर निगरानी, जनजागरूकता, समय रहते चेतावनी और बचाव के उपायों को बेहतर ढंग से लागू करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, इस पहल की वास्तविक सफलता समितियों के गठन तक सीमित रहने के बजाय संवेदनशील गांवों में समयबद्ध कार्रवाई, विभागीय जवाबदेही और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए ठोस इंतजामों पर निर्भर करेगी। अब देखना होगा कि शासन की यह पहल वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित ग्रामीणों को कितनी प्रभावी सुरक्षा दे पाती है।

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