अल्मोड़ा में गूंजे जनसरोकार: मजदूर, लोकतंत्र और अधिकारों पर उठे बड़े सवाल!
दर्पण न्यूज 24/7, अल्मोड़ा। उत्तराखंड की शांत वादियों में इस बार माहौल कुछ अलग रहा। 33वें उमेश डोभाल स्मृति सम्मान समारोह के पहले दिन आयोजित विचार गोष्ठी में समाज, लोकतंत्र और मजदूरों से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई। वक्ताओं ने साफ कहा कि आज जरूरत है जमीनी हकीकत को समझने और उस पर ठोस काम करने की।
वरिष्ठ चिंतक पी सी तिवारी ने कहा कि जब मेहनतकश वर्ग ही परेशान है, तो विकास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने जोर दिया कि केवल भाषणों से बदलाव नहीं आएगा, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करना होगा।
गोष्ठी में पर्यावरणविद सुरेश नौटियाल,वरिष्ठ पत्रकार चारु तिवारी,राजीव लोचन शाह,बल्ली सिंह चीमा,समेत तमाम वक्ताओं ने अपने संबोधन में उत्तराखंड के औद्योगिक विकास मॉडल पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि राज्य बनने के बाद रोजगार की जो उम्मीद जगी थी, वह पूरी तरह साकार नहीं हो पाई। बड़ी संख्या में युवा आज भी ठेका प्रणाली के तहत कम वेतन और असुरक्षित परिस्थितियों में काम करने को मजबूर हैं।
गोष्ठी में लोकतंत्र की कार्यप्रणाली पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि कई फैसले बिना जनसहमति के लिए जा रहे हैं, जिससे आम लोगों की भागीदारी कम होती जा रही है। इस दौरान चुनाव प्रणाली में सुधार, जैसे राइट टू रिकॉल और आनुपातिक प्रतिनिधित्व, की जरूरत पर भी बात रखी गई।
वरिष्ठ पत्रकार ईश्वर दत्त जोशी ने पहाड़ के गांवों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि लगातार पलायन के कारण गांव खाली होते जा रहे हैं और खेती प्रभावित हो रही है।
वरिष्ठ पत्रकार चारु तिवारी ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए जनता की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने चुनाव प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान जनकवि बल्ली सिंह चीमा की पंक्तियां
“जिंदा है तो सड़कों पर आ, संघर्षों में शामिल हो…”
ने माहौल को प्रेरणादायक बना दिया।
इस दौरान बाजपुर के पत्रकार विमल भारती के साथ हुए कथित अत्याचार का मुद्दा भी उठाया गया। वक्ताओं ने निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की।
उमेश डोभाल स्मृति ट्रस्ट के अध्यक्ष गोविंद पंत राजू ने कहा कि यह मंच समाज को जागरूक करने और लोगों को जोड़ने का प्रयास है। उन्होंने सभी से सकारात्मक दिशा में मिलकर काम करने की अपील की।
समापन में वक्ताओं ने कहा कि समाज को बेहतर बनाने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से आए पत्रकार, साहित्यकार,पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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