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हनुमान कृपा से ही राम प्रेम और जीवन-सिद्धि संभव: व्यास आचार्य सतीश लोहनी !
हल्दूचौड़ । श्री हनुमान मंदिर एवं श्री श्री 1008 बाबा केशव दास आश्रम, बाबाजी की कुटिया ग्राम दुम्काबंगर (उमापति, हल्दूचौड़) में चल रहे श्री हनुमान कथा ज्ञान यज्ञ सत्संग के सप्तम दिवस पर भक्ति, श्रद्धा और दिव्यता का अनुपम संगम देखने को मिला। व्यास आचार्य सतीश लोहनी जी ने भावपूर्ण प्रवचन में कहा कि हनुमान जी की कृपा के बिना श्रीराम से जीव का प्रेम संभव नहीं है। जीवन में सफलता, सभी मनोरथों की सिद्धि और परम पद की प्राप्ति हनुमान जी की शरण में आने से ही होती है।
आचार्य जी ने कहा कि हनुमान जी रामकृपा के सेतु हैं—जिन पर कृपा होती है, उन्हें सभी संकटों से मुक्ति का मार्ग स्वतः प्राप्त हो जाता है। उन्होंने भक्तों से आह्वान किया कि जीवन की बाधाओं से उबरने और आत्मिक उन्नति के लिए हनुमान शरणागति को अपनाएं—“जो कोई मनोरथ लावे, सोई अमित जीवन फल पावे।”
कथा स्थल पर वातावरण “जय बजरंगबली” और “श्रीराम जय राम” के जयघोष से गूंज उठा। भजन-कीर्तन और कथा श्रवण के बीच श्रद्धालु भाव-विभोर दिखाई दिए। इस पुण्य आयोजन में यजमान श्रीमती एवं श्री देवीदत्त बमेटा, श्रीमती एवं श्री दिनेश चंद्र मिश्रा सहित मंदिर पुजारी प्रकाश चंद्र जोशी, पंडित गणेश दत्त जोशी, आचार्य राजेश जोशी, ब्राह्मण कमल तिवारी, पंडित कैलाश चंद्र जोशी तथा श्री हनुमान जी एवं बाबा केशव दास जी के अनन्य भक्त हरिदत्त कांडपाल की गरिमामयी उपस्थिति रही।
मंदिर समिति के संरक्षक उमेश चंद्र कबड़वाल, अध्यक्ष कैलाश चंद्र दुम्का, सचिव बालाकृष्ण दुम्का, कोषाध्यक्ष खीमानंद तिवारी सहित पदाधिकारियों व कार्यकारिणी सदस्यों ने श्रद्धालुओं की व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यक्रम में पूर्व जनप्रतिनिधियों, जिला पंचायत सदस्यों, समाजसेवियों और क्षेत्रीय गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।
सप्तम दिवस की कथा ने श्रोताओं के हृदय में भक्ति का दीप प्रज्वलित कर दिया। श्रद्धालुओं ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि हनुमान कृपा का स्मरण जीवन में साहस, संयम और संकल्प को दृढ़ करता है—और यही रामकृपा तक पहुंचने का सुगम मार्ग है।