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बिग ब्रेकिंग |
उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग में बड़ा खुलासा!
अयोग्य ‘विशेषज्ञ’ डॉक्टरों की नियुक्ति से हड़कंप, सूचना के अधिकार से खुला घोटाला!
धर्मेंद्र शर्मा
देहरादून ।
उत्तराखंड के स्वास्थ्य विभाग में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक प्रदेश के कई अस्पतालों में ऐसे डॉक्टरों को विशेषज्ञ के पद पर नियुक्त कर दिया गया, जिनके पास विशेषज्ञता की अनिवार्य स्नातकोत्तर डिग्री तक नहीं थी और न ही उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल का आवश्यक पंजीकरण। इस गंभीर अनियमितता को सूचना के अधिकार कार्यकर्ता चंद्र शेखर जोशी ने उजागर किया है। उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की तत्काल जांच और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
यह मामला 28 अप्रैल 2025 को स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी उस आदेश से जुड़ा है, जिसके तहत 45 विशेषज्ञ डॉक्टरों की अस्थायी तैनाती की गई थी। दस्तावेज़ों की विस्तृत जांच में खुलासा हुआ कि इन तैनातियों में अनेक गंभीर कमियां थीं। कई डॉक्टर ऐसे पाए गए, जिन्होंने अभी तक उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण तक नहीं कराया था, जबकि कुछ डॉक्टर अपनी विशेषज्ञता की स्नातकोत्तर परीक्षा भी उत्तीर्ण नहीं कर सके थे। इन नियुक्तियों को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम 2019 और उत्तराखंड चिकित्सक व्यवसाय अधिनियम 2005 का सीधा उल्लंघन बताया गया है, जिसमें बिना पंजीकरण चिकित्सा अभ्यास करना दंडनीय अपराध माना गया है।
दस्तावेज़ों से यह तथ्य भी सामने आया कि 45 तैनात डॉक्टरों में से केवल 10 ही नियुक्ति के समय विशेषज्ञता की योग्यता पूरी करते थे। आठ डॉक्टर ऐसे थे, जो तैनाती के आठ महीने बाद भी अपनी शैक्षणिक योग्यता और पंजीकरण पूरा नहीं कर सके। दो डॉक्टर आज तक अपनी स्नातकोत्तर परीक्षा भी पास नहीं कर पाए हैं। यह स्थिति स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है।
मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब तैनात डॉक्टरों में शामिल डॉ. नेहा सिद्दीकी के नाम पर सितारगंज जिला अस्पताल में गर्भवती महिला की मौत का आरोप लगा। शिकायत में कहा गया है कि इलाज के दौरान उत्पन्न जटिलता को समय पर और सही तरीके से संभालने में डॉक्टर असफल रहीं, जिसके चलते महिला की जान चली गई। इस घटना को अयोग्य और अपंजीकृत डॉक्टर की तैनाती का दुखद परिणाम बताया जा रहा है।
इस पूरे प्रकरण को सामने लाने वाले सूचना के अधिकार कार्यकर्ता ने सरकार से यह मांग की है कि 28 अप्रैल के आदेश के तहत की गई सभी विशेषज्ञ तैनातियों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही उन अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, जिनकी जिम्मेदारी में इन अयोग्य डॉक्टरों की नियुक्तियाँ हुईं। उन्होंने यह भी कहा है कि जिन डॉक्टरों के पास आवश्यक योग्यता या पंजीकरण नहीं है, उनकी तैनाती तत्काल प्रभाव से निरस्त की जानी चाहिए। भविष्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की किसी भी नियुक्ति से पहले उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल अथवा राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग का पंजीकरण, स्नातकोत्तर योग्यता और सभी दस्तावेज़ों की कड़ी जांच अनिवार्य की जाए।
यह प्रकरण स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अयोग्य डॉक्टरों की तैनाती जनता के जीवन और स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। शिकायतकर्ता को उम्मीद है कि सरकार इस मामले में शीघ्र और कठोर कदम उठाकर स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वसनीयता को सुनिश्चित करेगी।

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