म्यूल अकाउंट सिंडिकेट पर एसटीएफ का बड़ा प्रहार, चार नए मुकदमे दर्ज !
दर्पण न्यूज 24/7ब्यूरो देहरादून। साइबर अपराधों में इस्तेमाल हो रहे म्यूल अकाउंट्स के खिलाफ स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने बड़ा अभियान चलाते हुए दो दिनों में चार नए मुकदमे दर्ज किए हैं। कार्रवाई के तहत संगठित साइबर अपराध सिंडिकेट से जुड़े चार आरोपियों को नामजद किया गया है, जबकि कई अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच जारी है। एसटीएफ के अनुसार पिछले एक माह में म्यूल अकाउंट्स से जुड़े कुल छह मुकदमे दर्ज कर 10 आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा चुकी है।
एसटीएफ की साइबर टीम ने एनसीआरपी, समन्वय पोर्टल, बैंकिंग अभिलेखों, केवाईसी दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और मनी ट्रेल एनालिसिस के आधार पर जांच की। जांच में सामने आया कि आर्थिक रूप से कमजोर और मजदूर वर्ग के लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने या पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जा रहे थे। इन खातों का उपयोग देशभर में होने वाली साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर स्थानांतरित करने और असली अपराधियों तक पहुंचाने के लिए किया जा रहा था।
एसटीएफ के अनुसार बिहार, केरल, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु समेत कई राज्यों में दर्ज साइबर अपराधों की रकम इन खातों में ट्रांसफर की जा रही थी। डिजिटल अरेस्ट, निवेश धोखाधड़ी, शेयर मार्केट फ्रॉड, ऑनलाइन ट्रेडिंग फ्रॉड और टास्क फ्रॉड जैसी वारदातों से अर्जित करोड़ों रुपये की राशि को छिपाने और लेयरिंग करने के लिए इन खातों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
सोमवार को थाना साइबर क्राइम देहरादून और कुमाऊं में तीन एफआईआर दर्ज कर चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया गया। प्रारंभिक जांच और स्थानीय सत्यापन के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66सी और 66डी के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयासों में जुटी है।
एसएसपी एसटीएफ ने कहा कि अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, सिम कार्ड या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को उपलब्ध कराना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में खाताधारक के खिलाफ भी मुख्य आरोपी के समान कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने लोगों से साइबर अपराधियों के झांसे में न आने और किसी भी प्रकार के लालच से बचने की अपील की है।
