








गैस संकट से प्रदेशभर में शादियों की रौनक फीकी, मेन्यू पर पड़ रही मार!
कमर्शियल सिलेंडर की किल्लत से कैटरर्स परेशान, कालाबाजारी के आरोपों से गरमाया माहौल!
दर्पण न्यूज 24/7ब्यूरो देहरादून।
उत्तराखंड में शादी-विवाह के सीजन के बीच रसोई गैस का गहराता संकट अब जटिल समस्या बनता जा रहा है। स्थिति यह है कि प्रदेश के अधिकांश जिलों में घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की कमी से शादी समारोहों के आयोजन प्रभावित हो रहे हैं। इस संकट के चलते जहां एक ओर कैटरर्स के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है, वहीं शादी वाले परिवारों को भी मेन्यू में कटौती करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
प्रदेशभर में अप्रैल से मई के बीच बड़ी संख्या में शादियां तय हैं। आयोजन से महीनों पहले टेंट, बैंक्वेट हॉल और कैटरिंग की बुकिंग के साथ विस्तृत मेन्यू भी तय कर लिया जाता है, लेकिन इस बार गैस की कमी ने तैयारियों को प्रभावित कर दिया है। कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों के अनुसार एक मध्यम स्तर के विवाह समारोह में 7-8 कमर्शियल सिलेंडरों की जरूरत होती है, जबकि बड़े आयोजनों में यह संख्या और अधिक हो जाती है।
गैस की आपूर्ति बाधित होने से कैटरर्स अब सीमित संसाधनों में काम चलाने को मजबूर हैं। कई स्थानों पर लकड़ी, कोयला और तंदूर जैसे वैकल्पिक इंतजाम किए गए हैं, लेकिन हर व्यंजन इन माध्यमों से तैयार करना संभव नहीं है। खासकर टिक्की, पावभाजी, तवा रोटी, जलेबी और चीला जैसे लाइव काउंटर वाले व्यंजन प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि इनके लिए तेज आंच और लगातार गैस सप्लाई जरूरी होती है।
कैटरर्स का कहना है कि मेहमानों की अपेक्षाओं के अनुरूप विविध व्यंजन परोसना अब मुश्किल हो गया है। ऐसे में कई आयोजनों में डिस्प्ले आइटम और स्पेशल काउंटर कम किए जा रहे हैं, जिससे शादी समारोहों की भव्यता पर असर पड़ रहा है।
वहीं दूसरी ओर, प्रदेशभर में गैस वितरण व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। विभिन्न व्यापारिक संगठनों ने कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कमी और कालाबाजारी के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सरकारी स्तर पर पर्याप्त आपूर्ति के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। कई स्थानों पर उपभोक्ताओं को घंटों लाइनों में खड़ा होना पड़ रहा है, जबकि व्यापारियों को समय पर सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।
व्यापार मंडलों ने आरोप लगाया है कि गैस एजेंसियों में पारदर्शिता की कमी है और निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। इसके चलते आम जनता और व्यापारी दोनों ही परेशान हैं। संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि गैस की कालाबाजारी पर सख्ती से रोक लगाई जाए और आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाया जाए।
चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो प्रदेशभर में आंदोलन किया जाएगा। फिलहाल, गैस संकट के कारण जहां घरों की रसोई प्रभावित है, वहीं सामाजिक आयोजनों की चमक भी फीकी पड़ती नजर आ रही है।
