राजनीति में आने से पहले परिवार की अनुमति का इंतजार, विधायक बना तो वेतन में रखूंगा सिर्फ एक रुपया।
बोले शुभम अंडोला- परिवार की सहमति मिली तो जनसेवा के लिए मैदान में उतरूंगा, नहीं तो पद के बिना भी जारी रहेगा सेवा का सफर।
हल्दूचौड़। राजनीति में आने को लेकर क्षेत्र में चल रही चर्चाओं के बीच समाजसेवी शुभम अंडोला ने अपने समर्थकों और शुभचिंतकों के सामने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि राजनीति में आने का फैसला वह अपने परिवार की सहमति और माता-पिता के आशीर्वाद के बाद ही लेंगे। फिलहाल उनके माता-पिता और धर्मपत्नी उनके राजनीति में आने के पक्ष में नहीं हैं। ऐसे में उन्होंने अंतिम निर्णय के लिए एक सप्ताह का समय मांगा है।
अंडोला ने कहा कि वह किसी नेता के रूप में नहीं, बल्कि जनता के अपने बेटे, भाई और साथी के रूप में अपनी बात रख रहे हैं। उनके लिए जनता का प्यार और विश्वास महत्वपूर्ण है, लेकिन माता-पिता का आशीर्वाद और परिवार की खुशी भी उतनी ही अहम है। उन्होंने कहा कि वह ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहते, जिससे उनके अपने दुखी हों।
उन्होंने कहा कि एक सप्ताह के भीतर वह परिवार से दोबारा बात करेंगे और उन्हें जनता की भावनाओं तथा मिल रहे समर्थन से अवगत कराएंगे। यदि माता-पिता का आशीर्वाद और धर्मपत्नी की अनुमति मिली तो भगवान भोलेनाथ को साक्षी मानकर वह जनसेवा के इस मार्ग पर आगे बढ़ेंगे। वहीं, परिवार की अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में भी उन्होंने समाज सेवा से पीछे नहीं हटने की बात कही।
अंडोला ने संभावित राजनीतिक सफर को लेकर एक महत्वपूर्ण संकल्प भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि यदि जनता उन्हें विधायक बनने का अवसर देती है तो विधायक के वेतन में से वह केवल एक रुपया अपने पास रखेंगे और शेष राशि गरीबों, असहाय परिवारों, गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों, बच्चों की शिक्षा, बेटियों की मदद और समाज सेवा के कार्यों में समर्पित करेंगे।
उन्होंने कहा कि उनके लिए राजनीति कमाई का माध्यम नहीं, बल्कि जनसेवा का अवसर होगी। उनका मानना है कि जनप्रतिनिधि का सबसे बड़ा दायित्व जनता के विश्वास पर खरा उतरना है। उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी पूंजी बैंक बैलेंस नहीं, बल्कि लोगों का विश्वास है और वह पद से अधिक लोगों के दिलों में जगह बनाना चाहते हैं।
अंडोला ने कहा कि वह ऐसी राजनीति की कल्पना करते हैं, जिसमें जनता सबसे ऊपर हो। गरीब की आवाज सुनी जाए, जरूरतमंद परिवारों को मदद मिले, कोई युवा अवसर के अभाव में पीछे न रह जाए और हर व्यक्ति को यह भरोसा हो कि उसका जनप्रतिनिधि उसके सुख-दुख में साथ खड़ा है।
उनका कहना है कि वह जनता से केवल वोट नहीं, बल्कि विश्वास मांगते हैं। यदि कभी वह अपने संकल्प से भटकें तो जनता उन्हें उनके इस वचन की याद दिलाए। उन्होंने कहा कि माता-पिता के संस्कार, भगवान भोलेनाथ की कृपा और जनता का आशीर्वाद ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
अब सबकी नजरें उस एक सप्ताह पर टिकी हैं, जिसके बाद अंडोला राजनीति में आने को लेकर अपना अंतिम निर्णय सामने रख सकते हैं। परिवार की सहमति मिली तो वह राजनीतिक मैदान में उतरेंगे या फिर बिना किसी पद के ही जनसेवा का अपना सफर जारी रखेंगे, इसका फैसला आने वाले दिनों में होगा। हालांकि, उनके इस संदेश ने क्षेत्र की राजनीतिक चर्चाओं को जरूर नई दिशा दे दी है।
